दो सीमांत जिलों चंपावत व पिथौरागढ़ के हाल
30% बसें निर्धारित दूरी तय करने के बाद भी रोड पर दौड़ रहीं
80 नई बसों की टनकपुर, लोहाघाट व पिथौरागढ़ डिपो के लिए की गई है मांग
देवभूमि टुडे
चंपावत। रोडवेज के टनकपुर क्षेत्रीय कार्यालय में 56 करोड़ से बन रहे ISBT (अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल) की लागत बढ़ाकर 236 करोड़ की जा चुकी है। चंपावत के बस स्टेशन से भले ही महत एक ही सीधी बस सेवा है, लेकिन इस स्टेशन को 62 करोड़ की लागत से अपग्रेड कर खूबसूरत बनाया जाएगा। इस तिमंजिले भवन में रोडवेज बस अड्डे के अलावा पार्किंग व मार्केट कांप्लैक्स भी बनेगा।
आधारभूत ढांचे को सशक्त करने के लिए ये जरूरी हो सकता है, लेकिन उसी रोडवेज के पास अपने मुसाफिरों के लिए भरोसेमंद बसें नहीं है। ऐसी बसें, जो रास्ते में रुके बगैर यात्रियों को मंजिल तक पहुंचा सके। ऐसी बसें, जिनका ब्रेक फेल न हो या तकनीकी खामी न हो। ऐसी बसें, जिन पर सवार रोडवेज मुसाफिर भरोसा कर सकें। ये त्रासदी एक नहीं, दो-दो सीमांत के जिलों की है। ऐसे जिले, जिसमें एक मौजूदा मुख्यमंत्री है और दूसरे जिले में पूर्व CM। लेकिन सड़क परिवहन पर निर्भरता वाले चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के ये हाल हैं।

टनकपुर के मंडलीय प्रबंधक आलोक बनवाल बताते हैं कि रोडवेज के टनकपुर मंडल (टनकपुर, लोहाघाट व पिथौरागढ़ डिपो) में निगम की अपनी 196 बसें हैं। इसके अलावा 24 बसों को अनुबंधित किया गया है। इनमें से भी 30% बसे वे हैं, जो कायदे-कानूनों को ताख पर रख कर चल रही हैं। 20% अन्य बसों के हाल भी ठीकठाक नहीं है। महज 50% बसें ऐसी हैं, जो रोड पर सरपट चलने लायक हैं। बसों की कमी को खुद निगम के अधिकारी स्वीकार करते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी:
'टनकपुर मंडल को काफी बसों की जरूरत है। 80 बसों की मांग निगम मुख्यालय को भेजी गई है।'
आलोक बनवाल,
मंडलीय प्रबंधक, टनकपुर।
बे-बस रोडवेज कैसे लेगा यात्रियों की सुध:
चंपावत। इन हालातों के बीच यात्री अक्सर असमंजस और असहजता के बीच सफर करने को मजबूर हैं। कल 19 जनवरी की तरह बस का ब्रेक फिर फेल न हो या किसी अन्य खामी की वजह से यात्रियों को बीच मंझधार में न अटकना पड़े, इसके लिए परिवहन निगम के बस बेड़े को बढ़ाना बेहद जरूरी है। साथ ही रोडवेज के वर्कशॉप में कार्मिकों के खाली पदों को भरने को प्राथमिकता देनी होगी। बसों के उपकरणों की उपलब्धता भी आवश्यक है। लेकिन सवाल यह कि क्या इस ओर ध्यान दें यात्रियों की जरूरतों की सुध ली जाएगी? इसी जवाब से रोडवेज का सफर कितना सरपट रफ्तार पकड़ेगा, यह तय होगा।
मानक पूरी कर चुकी थी ब्रेक फेल बस:
लोहाघाट। सोमवार सुबह लोहाघाट डिपो की काशीपुर जा रही बस का (यूके 07 ए 2915) लोहाघाट स्टेशन से निकलते ही एकाएक बस का ब्रेक फेल हो गया था। 7 लाख किमी से अधिक चल चुकी यह 42 सीटर बस का एकाएक ब्रेक फेल हो गया। इससे बस NH पर स्थित स्टेशन के पास की दीवार से टकरा गई। चालक नंदन सिंह फर्त्याल की सूझबूझ से बड़ी दुर्घटना होते-होते बची। वैसे रोडवेज के लोहाघाट डिपो के कुल 34 बस बेड़े में से 11 ऐसी हैं, जो निश्चित दूरी तय कर चुकी हैं।
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