Thursday Apr 16, 2026

600 नाली भूमि चिन्हित

महाविद्यालय परिसर को तीन प्रमुख जोनों में विभाजित करते हुए विकसित करने की योजना

पिछले साल CM पुष्कर सिंह धामी ने किया था ऐलान

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा परिसर

देवभूमि टुडे

चंपावत। चंपावत के कृषि महाविद्यालय के लिए नरियालगांव में करीब 600 नाली भूमि का चिन्हीकरण कर लिया गया है। DM मनीष कुमार की अध्यक्षता में आज 15 अप्रैल को हुई समीक्षा बैठक में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से आए विशेषज्ञों ने महाविद्यालय की स्थापना, संरचना, पाठ्यक्रम एवं दीर्घकालिक विकास को लेकर अपने तकनीकी सुझाव प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2025 में चंपावत जिले में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी।

अधिकारियों की बैठक लेते DM मनीष कुमार।

विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय कृषि परिस्थितियों, स्थानीय फसलों, अनुसंधान की संभावनाओं एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को ध्यान में रखते हुए संस्थान को विकसित करने पर बल दिया।DM ने CNDS के EE टीसी पंत को निर्देशित किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की गाइडलाइन के अनुरूप विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन शीघ्र तैयार किया जाए, जिससे महाविद्यालय को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके। EE पंत ने बताया कि प्रस्तावित महाविद्यालय परिसर को तीन प्रमुख जोनों में विभाजित करते हुए विकसित करने की योजना बनाई गई है।

प्रस्तावित योजना के अनुसार प्रथम जोन (एकेडमिक जोन) में दो अत्याधुनिक शैक्षणिक भवनों के साथ एक प्रशासनिक भवन का निर्माण किया जाएगा, जहां शिक्षण, प्रयोगशालाएं एवं प्रशासनिक कार्य संचालित होंगे। द्वितीय एवं तृतीय जोन में आवासीय परिसर एवं छात्रावास (हॉस्टल ब्लॉक) विकसित किए जाएंगे, जिससे छात्र-छात्राओं एवं कार्मिकों के लिए समुचित आवासीय सुविधा उपलब्ध हो सके।

DM ने निर्देश दिए कि महाविद्यालय का डिजाइन तैयार करते समय भविष्य में विस्तार की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाए, ताकि आने वाले समय में नए पाठ्यक्रम, शोध केंद्र एवं अन्य अधोसंरचनात्मक सुविधाओं को जोड़ा जा सके।

परिसर को आधुनिक एवं समग्र शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए इसमें ऑडिटोरियम, इन्क्यूबेशन सेंटर, कम्प्यूटर सेंटर, समृद्ध डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास रूम, अनुसंधान प्रयोगशालाएं एवं अन्य आवश्यक आधुनिक सुविधाएं भी अनिवार्य रूप से शामिल करने को कहा गया।

बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि महाविद्यालय की स्थापना केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय कृषि विकास, नवाचार, स्टार्टअप्स एवं किसानों के प्रशिक्षण का भी एक प्रमुख केंद्र बने। इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है।

DM ने प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अंतिम रूप देते हुए शासन को भेजने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त कर निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से प्रारंभ किया जा सके। बैठक में ADN कृष्णनाथ गोस्वामी, DDO दिनेश सिंह दिगारी, CVO डॉ वसुंधरा गर्ब्याल, CAO डी कुमार, DHO मोहित मल्ली, पंतनगर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।




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