सामाजिक कार्यकर्ता हरगोविंद बोहरा ने टनकपुर से देहरादून की दूरी कम करने के लिए कंडी को मुख्य मार्ग बनाने की मांग की
सीमांत के दो पहाड़ी जिलों के लोगों का सड़क का फासला कम होने के साथ ही पर्यटन और कारोबार भी बढ़ेगा
देवभूमि टुडे
चंपावत। सामाजिक कार्यकर्ता हरगोविंद बोहरा ने चंपावत जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर से हल्द्वानी और देहरादून की दूरी को कम करने के लिए कंडी मार्ग को मुख्य मार्ग बनाने की मांग की है। कहा कि इससे न केवल सीमांत के दो पहाड़ी जिलों के लोगों का सड़क का फासला कम होगा, बल्कि पर्यटन और कारोबार बढ़ने से लोगों की आर्थिकी में भी बढ़ोतरी होगी।
उन्होंने कहा कि इस मार्ग के बनने से कारोबारियों के अलावा आम नागरिकों को लाभ होने हे साथ यह बहु उपयोग मार्ग होगा। कंडी मार्ग निर्माण से टनकपुर से चोरगलिया, हल्द्वानी, कालाढूंगी, रामनगर होते हुए देहरादून के लिए दूरी करीब 100 किमी कम होगी। वर्तमान में ये दूरी 356 किमी है। टनकपुर से देहरादून तक के लिए कंडी मार्ग को प्रमुख मार्ग बनाने की मांग करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता बोहरा ने कहा कि इससे टनकपुर-देहरादून के बीच आवागमन सुगम होगा।

वैसे कंडी मार्ग को लेकर पूर्व में भी पहल की गई थी, मगर वे किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सके थे। उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार के मुखिया एनडी तिवारी ने भी टनकपुर से देहरादून के लिए कंडी मार्ग का प्रस्ताव पारित किया था, जिस पर आगे कोई कार्य नहीं हो पाया। वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी ने टनकपुर-हल्द्वानी के लिए कंडी मार्ग का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बाद इस ओर कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता बोहरा ने लोहाघाट के बायपास में टनल के स्थान पर लोहावती नदी के पास से पाटनपुल तक वैकल्पिक बायपास का सुझाव भी दिया है। कहा कि 2 किमी के इस वैकल्पिक मार्ग पर अधिक पेड़ कटने से बचने के साथ पर्यावरण की भी क्षति से भी निजात मिल सकेगी। जाम से बचाव के अलाव पर्यटन और कारोबारी गतिविधियां भी बढ़ सकेगी।
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