चंपावत के पैती गांव के निवासी डॉ. शरद चंद्र जोशी की असम की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित पुस्तक "चार्मिंग असम: द लैंड ऑफ माटी ब्रह्मपुत्र" का विमोचन हुआ
नागालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. समुद्रगुप्त कश्यप और प्रख्यात व्यक्तित्व बोलिन बोरदोलोई ने संयुक्त रूप से पुस्तक का अनावरण किया
देवभूमि टुडे
चंपावत/गुवाहाटी। असम की समृद्ध संस्कृति और ब्रह्मपुत्र की गौरवशाली विरासत को संजोए हुए लेखक डॉ. शरद चंद्र जोशी की नवीनतम पुस्तक "चार्मिंग असम: द लैंड ऑफ माइटी ब्रह्मपुत्र" का विमोचन 23 फरवरी को गुवाहाटी के होटल टोक्यो टावर में हुआ।
इस अवसर पर नागालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. समुद्रगुप्त कश्यप और प्रख्यात व्यक्तित्व बोलिन बोरदोलोई ने संयुक्त रूप से पुस्तक का अनावरण किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. देवव्रता शर्मा, डॉ. रॉबिन कलिता, IIBM गुवाहाटी के डॉ. अभिजीत शर्मा, CRD के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा और डॉ. वंदना भुयान मौजूद थे। विद्वानों ने डॉ. जोशी के लेखन की सराहना करते हुए इसे पूर्वोत्तर और उत्तर भारत के बीच एक सांस्कृतिक सेतु बताया।
लेखक का परिचय और उपलब्धियां:
मूल रूप से उत्तराखंड के चंपावत के पैती गांव के निवासी डॉ. शरद चंद्र जोशी साहित्य जगत का प्रतिष्ठित नाम हैं। वर्तमान में वह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में परियोजना निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। डॉ. जोशी अब तक 25 पुस्तकें लिख चुके हैं। जो उनके गहन अध्ययन और समाज के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं।
सामाजिक सरोकारों से जुड़ा लेखन:
डॉ. जोशी का लेखन सिर्फ साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके कार्यों का मुख्य केंद्र महिला उत्थान, बाल विकास और सामाजिक जागरूकता रहा है। उनकी अधिकांश पुस्तकें समाज के वंचित वर्गों की समस्याओं और उनके समाधान पर आधारित होती हैं। इसके साथ ही, उन्होंने उत्तराखंड की कला, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर भी व्यापक लेखन किया है। जिससे प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा मिली है।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रयास:
इस नई पुस्तक "चार्मिंग असम" के माध्यम से डॉ. जोशी ने ब्रह्मपुत्र की घाटी, असम के जनजीवन और वहां की अनूठी परंपराओं को लिपिबद्ध किया है। विमोचन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि एक उत्तराखंडी लेखक द्वारा असम पर इतनी गहराई से लिखना राष्ट्रीय अखंडता और सांस्कृतिक विनिमय का बेहतरीन उदाहरण है।
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