चंपावत क्षेत्र पंचायत की छतकोट ग्राम पंचायत की पहल, 30 अप्रैल को हुए विवाह से हुआ श्रीगणेश, शगुन के रूप में मिली नकद धनराशि में से 20 प्रतिशत हिस्सा दहेज में दिया जाएगा, जबकि शेष 80 प्रतिशत राशि कन्या पक्ष विवाह के उपयोग में लाएगा
देवभूमि टुडे
चंपावत। चंपावत जिले की छतकोट ग्राम पंचायत ने एक नायाब पहल की है। विवाह और अन्य मांगलिक मौकों पर दी जाने वाली शगुन की राशि को लेकर ये कदम उठाया गया है। अब शगुन की संपूर्ण राशि दहेज के रूप में नहीं दी जाएगी। ऐसा करने का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर कन्या पक्ष को राहत पहुंचाना है। आज 30 अप्रैल को छतकोट ग्राम पंचायत में हुए विवाह से इसका बाकायदा श्रीगणेश कर दिया गया है। ग्राम प्रधान रेखा बोहरा और पंचायत के दूसरे सदस्यों ने गांव के बजुर्गों और अन्य लोगों से मश्विरा कर इस पहल को शुरू किया है।
पिछले महीने अनूठी रामलीला (महिला किरदार महिला और पुरुष पात्रों को पुरुषों द्वारा अभिनय किया गया) कराने वाली छतकोट ग्राम पंचायत ने एक और नेक पहल की है। विवाह में मेहमानों और नाते-रिश्तेदार कन्या पक्ष को शगुन में धन या दूसरे उपहार देते हैं। आमतौर पर उपहार के साथ नकद की समूची राशि दहेज में दे दी जाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर कन्या के परिजनों का आर्थिक भार बढ़ जाता है। खासकर दूरदराज और कमजोर ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की स्थिति आती है। छतकोट ग्राम पंचायत ने सभी से मंथन कर यह तय किया कि शगुन के रूप में मिली नकद धनराशि में से 20 प्रतिशत हिस्सा दहेज में दिया जाएगा। जबकि शेष 80 प्रतिशत राशि कन्या पक्ष विवाह के उपयोग में लाएगा। कहा कि आज जो व्यक्ति किसी की बेटी के विवाह में शगुन दे रहा है, तो उसने भी कभी अपनी बेटी की शादी में दूसरों से सहयोग लिया होगा या भविष्य में जब उनके घर आयोजन होगा, तब उसे यही सहयोग वापस मिलना स्वाभाविक है।
प्रधान का कहना है कि शगुन की यह परंपरा एक प्रकार से 'आज आपकी मदद, कल मेरी मदद' के सिद्धांत पर टिकी है। जो आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्र में एकता और सहयोग का भाव बनाए रखती है। आज 30 अप्रैल को छतकोट में हुए एक विवाह से इस पहल का श्रीगणेश कर दिया गया है। ग्रामीणों की इस पहल का खुद दूल्हे और उनके परिजनों ने भी स्वागत किया।
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