उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन की जिला इकाई की बैठक
10 प्रस्ताव पारित
जिला शिक्षाधिकारी को ज्ञापन भी दिया
देवभूमि टुडे
चंपावत। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरने की मांग की है। आज 17 फरवरी को जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह बोहरा की अध्यक्षता एवं महामंत्री बंशीधर थ्वाल के संचालन में हुई जिला इकाई की बैठक में शिक्षा, छात्र व शिक्षक हित में प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई।
बैठक में 10 प्रस्ताव भी पारित हुए। इन मांगों को लेकर जिला शिक्षाधिकारी को ज्ञापन भी दिया गया। शिक्षकों की समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की गई। कहा गया कि इन मांगों पर तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
बैठक में कोषाध्यक्ष कमल जोशी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्तम सिंह फर्त्याल, जिला उपाध्यक्ष रूद्र सिंह बोहरा, लोहाघाट के ब्लॉक अध्यक्ष कैलाश सिंह फर्त्याल, चंपावत के ब्लॉक अध्यक्ष कवींद्र सिंह तड़ागी, बाराकोट के ब्लॉक अध्यक्ष रामप्रसाद कालाकोटी, पाटी के ब्लॉक अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, मंत्री हरि विनोद पंत, नवीन चंद्र जुकरिया, चतुर सिंह महरा, सुरेश चंद्र, संजय कुमार, कीर्ति बल्लभ भट्ट, गंगा दत्त भट्ट, हरीश पांडेय, प्रकाश चंद्र गड़कोटी आदि मौजूद थे।


ये प्रस्ताव पारित हुए:
1.जिले में कई स्कूल ऐसे है जहां छात्र संख्या कम व अध्यापक संख्या अधिक है। इसके विपरीत अधिक छात्र संख्या कम शिक्षक वाले स्कूल भी हैं। ऐसे विद्यालयों में मानकानुसार शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नतीजा छात्र निजी स्कूलों की तरफ रूख कर रहे हैं। कई विद्यालयों में मानक से अधिक शिक्षक और दूसरी ओर अधिक छात्र वाले स्कूलों में कम शिक्षक कार्यरत है। शासनादेश के अनुसार सर्वप्रथम प्राथमिकता से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में अध्यापकों की पूर्ति होनी चाहिए।
2.कार्यालय स्तर पर शिक्षकों की समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द किया जाए। जिला या विकासखंड स्तर पर शिक्षकों की समस्या के समाधान में देरी होती है, तो शिक्षक को विद्यालय छोड़कर स्वयं कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जिस कारण बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अतः जिले व विकासखंड स्तर पर त्वरित गति से समस्याओं का समाधान किया जाए।
3.चयन/प्रोन्नत वेतन स्वीकृत आदेश निर्गत हो, ताकि शिक्षकों को वेतन में इसका लाभ मिल सके।
4.वर्ष 2006 से 2009 के बीच का पिथौरागढ़ जिले से प्राप्त GPF ब्याज की राशि का शिक्षकों को भुगतान नहीं किया गया है। इस प्रकार कई वित्तीय समस्याएं लंबित होने से शिक्षकों को वित्तीय हानि होने को साथ-साथ GPF में मिलने वाले ब्याज का भी नुकसान हो रहा है। अतः वित्तीय प्रकरणों से संबंधित समस्याओं का समाधान स्वयं के स्तर के साथ-साथ उप शिक्षाधिकारी कार्यालयों को भी प्रकरणों के समाधान के स्पष्ट आदेश निर्गत हों।
5.जिले के कई विकासखंडों में शिक्षकों को सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान नहीं हुआ है। शिक्षा विभाग में अध्यापक के अतिरिक्त कोई भी कर्मचारी या अधिकारी इस लाभ से वंचित नहीं होगा। इस एरियर के भुगतान नहीं होने से अध्यापकों को हर साल 10 से 15 हजार रुपये के GPF
ब्याज में नुकसान हो रहा है। अतः त्वरित गति से एरियर अवशेष भुगतान करने की कार्यवाही हो।
6.विगत दो वर्षों से आदर्श विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। छात्र हित में इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
7.बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के उद्देश्य से विद्यालयों का शैक्षिक व भौतिक अनुश्रवण करने के लिए विकासखंड स्तर के अधिकारियों को निर्देशित किया जाए।
8.वर्ष 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET ( शिक्षण पात्रता परीक्षा) से मुक्त करने पर चर्चा की गई। इस पर न्यायालय में मामला है।
9.मार्च में होने वाले NMOPS () पर भी चर्चा हुई। OPS बहाली के लिए मार्च में दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम के लिए अधिक से अधिक शिक्षक हिस्सा लेंगे।
10.रुपये 17140=00 वेतन विसंगति पर चर्चा की गई। DEO से वार्ता कर सभी BEO को वेतन निर्धारण के लिए आदेश निर्गत करने को अनुरोध।
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