टनकपुर में ई-रिक्शा चला परिवार की गाड़ी खीच रही
हिम्मत और हौसले से परिवार को सम्मानजनक जीवन दे रही गौरी देवी
भुवन पाटनी/देवभूमि टुडे
चंपावत/टनकपुर। चंपावत जिले का मैदान क्षेत्र टनकपुर। टनकपुर का बोरागोठ गांव यूं तो सामान्य गांव है, लेकिन इस गांव की एक महिला के संघर्ष, जज्बे और हौसले ने मिसाल कायम की है। कठिन हालात के बीच घर से बाहर काम कर परिवार की आत्मसम्मान के साथ परवरिश कर रही है।

57 साल की गौरी देवी ई-रिक्शा चलाकर न केवल परिवार का भरण पोषण कर रही हैं, बल्कि उनका यह हुनर जरूरतमंद महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रहा है। गौरी देवी के ई-रिक्शा चलाने की शुरूआत 8 साल पूर्व तब हुई, जब घर में मुश्किल परिस्थितियां थीं। एक बेटे की मौत हो गई थी। ई-रिक्शा चलाने वाले गौरी के पति कल्लू राम भी रिक्शा चलाते थे, लेकिन अक्सर बीमार रहने से हालात बिगड़ रहे थे। परिवार पर कर्ज भी था। इन हालातों के बीच गौरी देवी ने अपने कंधे पर जिम्मेदारी ली। उन्होंने परिवार की गाड़ी चलाने के लिए रोजी रोटी और बच्चों की पढ़ाई के लिए ई-रिक्शा चलाने का फैसला किया। शुरुआती ना-नुकुर के बाद पति ने इजाजत भी दी और खुद रिक्शा चलाना सीखाने के साथ हौसला भी बढ़ाया। 5 साल पूर्व पति की भी मौत हो गई। जिससे उनके कंधों पर जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई। लेकिन हिम्मत और निरंतर ई-रिक्शा चलाकर गौरी देवी ने अपने परिवार को सम्मान के साथ जीवन जीने लायक बना दिया। इस काम से महीने में 10 हजार रुपये से ज्यादा कमा लेती हैं। उनके काम का खूब सम्मान भी हुआ। साथ ही गौरी देवी अब अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनी हुई है।
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