राहत कोष की सूची में नाम होने का कुछ लोगों द्वारा लगाए आरोपों से आहत BIP जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत की चुनौती
राहत कोष की सूची की आड़ में कुछ लोग उन्हें टारगेट कर रहे: गोविंद सामंत
'ढाई दशक का सार्वजनिक जीवन बेदाग और लोगों के सुख-दुख में हाथ बंटाने का रहा है'
देवभूमि टुडे
चंपावत। भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत ने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष की सूची की आड़ में कुछ लोग उन्हें टारगेट करने का प्रयास कर रहे हैं। कल 8 अप्रैल की रात फेसबुक पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि उन्होंने राहत कोष के जरिए एक भी रुपये नहीं लिया है, लेकिन झूठे आरोप लगा कुछ लोग उन्हें मानसिक पीड़ा पहुंचा रहे हैं।

मार्च 2025 में BJP के जिलाध्यक्ष बने सामंत ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि उनका नाम राहत कोष से रुपये लेने वालों की लिस्ट में है, तो वे राजनीति से ही सन्यास ले लेंगे। उन्होंने कहा कि उनका ढाई दशक का अब तक का सार्वजनिक जीवन बेदाग और लोगों के सुख-दुख में हाथ बंटाने का रहा है। सामंत ने कहा कि उनकी सियासत के मूल में लोगों की सेवा सर्वोपरि रही है। बड़ी संख्या में बीमार लोगों की चंपावत और चंपावत जिले से बाहर के सरकारी एवं निजी अस्पतालों में इलाज में मदद करते रहा हूं। लेकिन कतिपय लोगों द्वारा इस सूची के जरिए उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। सामंत ने राहत कोष से किसी भी तरह की मदद लिए जाने के कुछ लोगों द्वारा लगाए आरोपों को सफेद झूठ कहा है। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ी, तो वे कानूनी कारवाई के विकल्प पर भी विचार करेंगे।
RTI के जरिए सार्वजनिक की गई राहत कोष के लाभार्थियों की सूची में वित्त वर्ष 2024-25 में 'अध्यक्ष' का नाम अंकित है। ये अध्यक्ष कौन है, किसी राजनीतिक दल का है या किसी अन्य संगठन का? यह भी साफ नहीं है। लेकिन 'अध्यक्ष' नाम लिखा होने से कई लोग बिना तस्दीक किए अपने-अपने तरीकों से कयासबाजी में जुट गए हैं।
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