चंपावत गांधी चौक में व्यापारियों का हल्लाबोल, BJP से जुड़े हैं 90% से अधिक व्यापारी, UGC के नए नियमों को बताया सवर्ण विरोधी, रोलबैक के नारे लगाए
देवभूमि टुडे
चंपावत। चंपावत के अधिकांश व्यापारी भले ही BJP से जुड़े हैं, लेकिन इस साल से UGC के 13 जनवरी से लागू नए नियमों ने व्यापारियों में नाराजगी बढ़ा दी है। आज व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने चंपावत के गांधी चौक पर प्रदर्शन कर UGC के नियमों में संशोधन की मांग की है।
व्यापार मंडल पदाधिकारियों ने UGC की Equaity committee को अन्यायपूर्ण एवं सवर्ण विरोधी करार दिया। व्यापारियों ने रोलबैक UGC कानून के नारे लगाए। सवर्ण वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण बताया। इससे सामान्य वर्ग छात्रों के लिए अलग शिकायत तंत्र नहीं है, जिससे दुरुपयोग का खतरा। इस कानून से सामाजिक विभाजन बढ़ेगा।
विरोध जताने वालों में व्यापार मंडल जिला महामंत्री कमलेश राय, नगर महामंत्री हरीश सक्टा, दिनेश जोशी, जगदीश जोशी, डीएस कठायत, नवीन सुतेड़ी, मुकुल पांडे, मदन जोशी, विमल पांडेय, भुवन भट्ट, अशोक पंत सहित बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल थे।
Equity Cell की है अहम भूमिका:
UGC के नए नियमों के मुताबिक, अब उच्च शिक्षा की सभी संस्थाओं में हर जगह एक Equity Cell बनाना ज़रूरी होगा। ये Cell एक तरह की अदालत जैसा काम करेगी। अगर किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ भेदभाव हुआ है, तो वह यहां जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगी। कमेटी की सिफारिश पर संस्थान को उस पर तुरंत एक्शन लेना होगा।
13 जनवरी को UGC ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनिमय 2026 जारी किया, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थाओं में समानता को बढ़ाना है ताकि किसी भी वर्ग के छात्र, छात्राओं के साथ भेदभाव को रोका जा सके। इसका उद्देश्य धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान, दिव्यांगता के आधार पर छात्र-छात्राओं से भेदभाव ना हो और विशेष रूप से SC, ST, OBC दिव्यांगों और इनमें से किसी भी वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध भेदभाव ख़त्म किया जा सके। इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा दिया जा सके। इसके मुताबिक़ जाति आधारित भेदभाव का अर्थ अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति या समुदाय के आधार पर भेदभाव है।
विवाद की मूल वजह जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा में OBC को शामिल करना है। नोटिफ़िकेशन के मुताबिक़ उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के लिए एक Equity Committee (समता समिति) बनाई जाएगी, जिसमें SC, ST, OBC, दिव्यांग व महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। ये समिति भेदभाव की शिकायतों की जांच करेगी। लेकिन इस समिति में सामान्य वर्ग के लोगों के प्रतिनिधित्व की बात क्यों नहीं कही गई है?
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