Wednesday Feb 4, 2026
26 जनवरी
(26-Jan-2026)

बातों-बातों में 

भगवत प्रसाद पाण्डेय

हम सब भारतीय पर्व- त्योहार प्रायः पंचांग देखकर ही मनाते हैं। बीते कुछ वर्षों में कई पर्व ऐसे रहे हैं, जो एक  नहीं, दो-दो तारीख़ों में निपट गए। कुछ आज वाले थे तो कोई कल वाले। कारण तिथि का चक्कर, भद्रा का फेर। इन्हें लेकर तर्क, कुतर्क और पंचांगों की अपने तरीके से व्याख्याएँ। पंचांगकार, कर्मकांडी पुरोहित और ज्योतिष सब अपनी-अपनी राय, सबके अपने-अपने हित निहित होते हैं। इससे आम आदमी असमंजस में पड़ जाता है। यह स्थिति कुछ-कुछ वैसी ही है, जैसी सरकारी महकमों में शासनादेश की पंक्तियों के अर्थ-अनर्थ निकालते समय होती है। 

वैसे राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस की तारीख़ को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए, पर देखिए ‘बातों-बातों में’ यहाँ भी भ्रम घुस ही गया। किसी ने मासूमियत से पूछ लिया—"इस बार 26 जनवरी कब है?”

पंडित जी ने पंचांग पलटा, माथा खुजलाया और गंभीर स्वर में बोले—"देखिए......तिथि तो 26 जनवरी (सोमवार) की ही है, लेकिन कुछ लोग 25 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या से इसे मना लेंगे और कुछ 27 को भी झंडा उतारते मिलेंगे।”

पंडित जी की बात सुनकर वहाँ बैठे लोग और उलझ गए। तभी अपनी कुंडली दिखाने आई एक महिला हँसते हुए बोली “गणतंत्र दिवस में तो कोई भद्रा का चक्कर नहीं है न?

पाटन-पाटनी (लोहाघाट)।

 

      




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