वनाग्नि रोकथाम के लिए समय पर पूरी करें तैयारियां:DM जिला स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक
जिले में 62098 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र, 82 फायर क्रू स्टेशन तैयार
देवभूमि टुडे
चंपावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने 15 फरवरी से शुरू हो रही फायर सीजन को दृष्टिगत रखते हुए वनाग्नि की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए सभी पुख्ता उपाय करने के निर्देश दिए। आज 24 जनवरी को हुई जिला स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक में कहा गया कि जिले में कुल 62098 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्रफल को आग से बचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। DM ने वन विभाग के अधिकारियों को वनों की आग से रोकने के लिए सभी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
विकासखंड स्तर पर गठित वनाग्नि समितियों को और अधिक प्रभावी बनाने, कंट्रोल बर्निंग को वैज्ञानिक ढंग से किए जाने व आग लगने की सूचना समय पर आम लोगों तक पहुंचाने, विभिन्न विभागों के मध्य अंतरविभागीय समन्वय से आग पर काबू पाने के निर्देश दिए।
चंपावत का अतिरिक्त जिम्मा संभाल रहे पिथौरागढ़ के DFO आशुतोष सिंह ने बताया कि फरवरी के प्रथम सप्ताह में अग्नि सुरक्षा सप्ताह का प्रभावी क्रियांवयन किया जाएगा। इसके अंतर्गत विद्यालयों में बच्चों के जरिए जन-जागरूकता के कार्यक्रम किए जाएंगे।जिले में वर्तमान में 82 फायर क्रू स्टेशन बनाए गए हैं।




DM ने वनाग्नि काल से पूर्व सभी तैयारियां पूर्ण करने, मॉडल फायर क्रू स्टेशन की अवधारणा को धरातल पर लागू करने एवं अग्निशमन उपकरणों को कार्यशील स्थिति में रखने को कहा। बैठक में जिला अग्नि प्लान 2026–27 पर भी चर्चा हुई। DM ने फायर सीजन से पूर्व पशुओं के लिए पेयजल एवं चारे की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने, वन विभाग द्वारा चाल-खाल की सफाई, पेयजल व्यवस्था एवं आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही फायर इमरजेंसी मैनेजमेंट के अंतर्गत प्रशिक्षित चिकित्सक, मेडिकल सुविधा एवं फायर टेंडरों की समयबद्ध तैनाती करने के निर्देश दिए। बैठक में CDO डॉ. जीएस खाती, ADN कृष्णनाथ गोस्वामी, SDM अनुराग आर्या, SDO (वन) सुनील कुमार, विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी के अलावा वन विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
निजी भूमि में 31 मार्च के बाद आड़ा जलाने पर रोक
वनाग्नि की अधिकांश घटनाओं के लिए लोगों की लापरवाही जिम्मेदार होती है। कई लोग नई घास प्राप्त करने के उद्देश्य से वनों में आग लगाते हैं। पैदल मार्गों से पिरूल हटाने के लिए आग लगाना अथवा निजी भूमि में आड़ा जलाना जैसे कार्य वनाग्नि के प्रमुख कारण हैं। ऐसे मिथकों के प्रति व्यापक जनजागरूकता बढ़ाने का निर्णय लिया गया। साथ ही वनों में आग लगाने वाले शरारती तत्वों के विरूद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। 31 मार्च के बाद जिले में आड़ा जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
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