चंपावत में गांधी मूर्ति के सम्मुख मनरेगा में बदलाव का किया विरोध
लेकिन कार्यकम से नदारद थे अधिकांश बड़े नेता
देवभूमि टुडे
चंपावत। कांग्रेस ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम और काम बदलने का विरोध किया है। इसे लेकर जिलाध्यक्ष चिराग फर्त्याल के नेतृत्व में कार्यकताओं ने चंपावत गांधी चौक पर उपवास किया। लेकिन कार्यक्रम में अधिकांश बड़े नेता नदारद थे।
कांग्रेस ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से रखी गई योजना में बदलाव कर भाजपा सरकार ने महात्मा गांधी का भी अपमान किया है। उन्होंने योजना का नाम फिर से मनरेगा रखे जाने की मांग की। आज 11 जनवरी को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनरेगा में बदलाव का विरोध करते हुए चंपावत में गांधी मूर्ति के सामने धरना दिया। कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के नाम और काम में बदलाव कर कमजोर तबके के हितों को नुकसान पहुंचाया है। कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से फरवरी 2006 से संचालित ऐतिहासिक योजना का नाम और काम के तरीके बदलकर बापू का भी अपमान किया गया है। यह सीधे तौर पर महात्मा गांधी के नाम और मूल्यों को मिटाने की साजिश है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि फरवरी 2006 से शुरू हुई मनरेगा योजना देश के गरीब कामगार लोगों के रोजगार का सशक्त जरिया है। केंद्र की भाजपा सरकार ने न केवल योजना का नाम बदलकर वीबी- राम जी (विकसित भारत गारंटी फार रोजगार और आजीविका मिशन) रखा, बल्कि योजना का स्वरूप भी बदल दिया।कार्यकर्ताओं ने योजना का नाम पूर्व की भांति रखने की मांग उठाई। उपवास में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मनीष महर, विमल पांडेय, जीवन सिंह बिष्ट, तुषार वर्मा, विजय कार्की, नवीन सिंह, राजू यादव, प्रमोद बड़ेला, विपिन जोशी, दीपक जोशी आदि मौजूद थे।

फरवरी 2006 से शुरू मनरेगा के स्थान पर केंद्र सरकार ने VB-G RAM G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन) नामसे 21 दिसंबर 2025 को नया कानून बनाया। सरकार ने इस कानून को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की कड़ी का एक हिस्सा बताया है।
‘मनरेगा’ और 'जी राम जी' में मुख्य अंतर:
1.नए कार में काम के दिन 100 से बढ़कर 125 हुए।
2.काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता, तो वह बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा। पहले ये वक्त 30 दिन था।
3.खेती बुवाई और कटाई के समय नहीं मिलेगा सरकारी काम।
4.मनरेगा में मजदूरी का पूरा 100% खर्च केंद्र उठाता था, लेकिन नए कानून में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए केंद्र-राज्य का खर्च 90:10 के अनुपात में होगा। वहीं अन्य राज्यों में अब 60:40 का फार्मूला लागू होगा।
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