वीडियो सामने आने पर भेजी गई थी टीम
चंपावत से प्रशासन व खनन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही रफ़ूचक्कर हुए अवैध खनन के धंधेबाज
चोरी को रोकने में भौगोलिक स्थिति और अधिक दूरी भी आ रही आड़े
देवभूमि टुडे
चंपावत/चूका। नेपाल सीमा से लगे चूका के आसपास के इलाक़ों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन के आरोप लग रहे हैं। कई बार इससे जुड़े वीडियो भी वायरल होते रहे हैं। जिनमें नियमों को ताख पर रख मशीनों से बेधड़क बेखौफ खनन होता दिखाई देता है। लेकिन पर्यावरण और राजस्व को चूना लगाने वाले इस अवैध खनन को रोकने में पूरा सिस्टम हांफ रहा है। यहां तक कि कल चंपावत से भेजी गई प्रशासन और खनन विभाग की टीम के हाथ भी खाली रहे।
टनकपुर-जौलजीबी रोड पर स्थित चूका के आसपास 3 (सीम, बंडा और मोस्टा क्षेत्र) में खनन के पट्टे स्वीकृत हैं। इनमें से कई जगह अवैध तरीकों से खनन के आरोप अक्सर लगते रहे हैं। मशीनों से बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन के एक वीडियो के 5 जनवरी की शाम वायरल होने के बाद इसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंची। यद्यपि ये वीडियो कहां का है और कब का है, सही है या नहीं है? इसको लेकर 'देवभूमि टुडे' अपने स्तर से न पुष्टि कर रहा है नहीं इनकार। पूरे मामले में दूध का दूध पानी का पानी वीडियो की जांच के बाद ही संभव हो सकेगा।
लेकिन वीडियो की जानकारी के बाद DM मनीष कुमार ने चंपावत से प्रशासन और खनन विभाग की टीम को कल 6 जनवरी को चूका क्षेत्र जाकर जांच करने के निर्देश दिए। चंपावत के तहसीलदार बृजमोहन आर्य और जिला खान अधिकारी चित्रा जोशी के नेतृत्व में गई टीम कल शाम लौट भी आई। प्रशासनिक अमले को मौके पर न मशीनें मिलीं नहीं कोई अन्य गड़बड़।


चंपावत के SDM अनुराग आर्य ने बताया कि टीम को मौके पर न मशीन मिली नहीं कोई अन्य गड़बड़। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में पूर्व में कई बार गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की गई हैं।
वैसे दिसंबर के पहले सप्ताह में तहसीलदार बृजमोहन आर्य के नेतृत्व में गई प्रशासन की टीम ने एक जेसीबी एक्सवोटर (चैनयुक्त टायर) को अवैध खुदान करते पकड़ा था। तब डंपर को सीज करने के साथ जुर्माने की कार्रवाई भी की गई थी।
अवैध खनन रोकने को उठाए जा सकते हैं ये कदम?
1.नेपाल सीमा से लगे चूका और आसपास के खनन क्षेत्र में राजस्व विभाग के इलाके के संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
2.अवैध खनन वाले क्षेत्रों में CCTV कैमरे लगाने का विकल्प।
3.खनन क्षेत्र वाला हिस्सा चंपावत तहसील में आता है, लेकिन वह इलाका चंपावत के बजाय टनकपुर के करीब है। वहां जाने के लिए चंपावत के अधिकारियों को पहले 75 किमी दूर टनकपुर और फिर टनकपुर से आगे बढ़ना होता है। चंपावत से इस फासले को पार करने में अधिक समय लगता है, जिसका लाभ अवैध खनन में लिप्त लोगों को मिल जाता है।
4.नेपाल सीमा से लगे इन क्षेत्रों के आसपास SSB की BOP (बॉर्डर आउटपोस्ट) है। SSB से समन्वय किया जा सकता है।
5.प्रशासन, पुलिस, खनन व वन विभाग आपसी समन्वय से संयुक्त कारवाई कर सकता है।
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