4 किलोमीटर डोली से चोटिल महिला को सड़क तक पहुंचाया
पूर्णागिरि धाम के सड़कविहीन कोटकेंद्री गांव के हाल
चारा काटते समय पेड़ से गिर गई थी पुष्पा
देवभूमि टुडे
चंपावत/पूर्णागिरि धाम। चंपावत आदर्श जिला है, लेकिन ये तस्वीर उसकी इस पदवी को कटघरे में खड़ा कर रही है। चोटिल महिला, डोली, लोग, कंधे, लंबी पैदल दूरी, सड़क और फिर अस्पताल। ये कड़वी हकीकत है, लेकिन है एकदम सच। पूर्णागिरि धाम के पास के गांव की ये तस्वीर कल 5 दिसंबर के शाम की है।
टनकपुर तहसील का नाम मां पूर्णागिरि धाम के नाम से है। लेकिन इसी पूर्णागिरि धाम के एक प्रमुख गांव कोटकेंद्री की ये चिंता पैदा करने वाली तस्वीर है। कल 5 दिसंबर की अपरान्ह पुष्पा देवी (35) पत्नी रतन सिंह बकरी का चारा काटते समय पेड़ से गिर गई। जख्मी पुष्पा देवी को इलाज की जरूरत थी, लेकिन गांव या आसपास इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी। चोटिल पुष्पा को टनकपुर ले जाना पड़ा। सड़कविहीन कोटकेंद्री गांव से रोड तक लाने के लिए 4 किलोमीटर डोली के सहारे लाया गया। लक्ष्मण सिंह, मदन, मोहन सिंह, दीपक सिंह आदि ने मदद की। फिर भैरव मंदिर से 20 किमी दूर जीप से टनकपुर अस्पताल तक पहुंचाया। इलाज के बाद महिला की हालत में सुधार हो रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी:
लोक निर्माण विभाग के चंपावत खंड के अधिशासी अभियंता मोहन चंद्र पलड़िया का कहना है कि 18 किलोमीटर लंबी पोथ से कोटकेंद्री होते हुए सेलागाड़ तक की सड़क की स्वीकृति की प्रक्रिया गतिमान है।

क्या कहते हैं जन प्रतिनिधि:
पूर्णागिरि (कालीगूंठ) के ग्राम प्रधान पंकज तिवारी का कहना है कि कोटकेंद्री तक रोड नहीं होने से लोगों को दुश्वारी हो रही है। पोथ से कोटकेंद्री होते हुए सेलागाड़ तक की सड़क की लंबे समय से मांग की जाती रही है, लेकिन रोड का सपना साकार नहीं हो सका। अलबत्ता कुछ समय पूर्व पोथ से कोटकेंद्री होते हुए सेलागाड़ तक की सड़क का लोक निर्माण विभाग ने सर्वे जरूर किया था। इसी तरह पूर्णागिरि क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद की मांग भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। सड़क और स्वास्थ्य सुविधा नहीं होने का खामियाजा नेपाल सीमा से लगे पूर्णागिरि क्षेत्र के लोग भुगत रहे हैं।

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