देवभूमि टुडे
चंपावत/टनकपुर। चंपावत जिले के सूखीढांग क्षेत्र के नामी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी की 25वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आजादी की लड़ाई में उनके योगदान को याद किया गया। इस मौके पर टनकपुर में सेनानी पुत्र महेश चंद्र चौड़ाकोटी सहित कई लोग मौजूद थे।
सेनानी रामचंद्र ने जेल में भी नहीं छोड़ा था अनशन
चंपावत। सूखीढांग क्षेत्र ने 7 (रामचंद्र चौड़ाकोटी, बेनीराम चौड़ाकोटी, जयदत्त चौड़ाकोटी, पदमादत्त चौड़ाकोटी, चूढ़ामणि जोशी, चिंतामणि जोशी व बची सिंह राणा) सेनानी दिए हैं। इस गांव के पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी का नाम कुमाऊं के प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में था। उनमें देश को आजाद करने की अद्भुत ललक थी।

1 जनवरी 1914 को किसान परिवार में जन्में इस शख्स के जुनून ने दो बार जेल में भी अनशन किया। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 50 रुपए के जुर्माने के अलावा अल्मोड़ा से लेकर बरेली तक जेल की यातानाएं सहीं।
प्राइमरी से आगे की पढ़ाई के लिए खेतीखान गए रामंचद्र का संपर्क काली कुमाऊं के शेर पंडित हर्षदेव ओली से हुआ। उनकी प्रेरणा ने चौड़ाकोटी में गुलामी के खिलाफ लड़ने का जोश भरा और वे आजादी की जंग में कूद गए। 28 साल की उम्र में उन्होंने देवीधुरा में प्रदर्शन किया। अंग्रेजी हुकूमत ने दो हफ्ते बंद रखने के बाद उन्हें रिहा किया।
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ योजनाबद्ध जंग के लिए पंडित चौड़ाकोटी ने कांग्रेस मंडल चौड़ाकोट संगठन बनाया और श्यामलाताल में संघर्ष का बिगुल बजाया। डांडा, बुड़म जैसे दूरदराज के इलाकों में भी अंग्रेजों के खिलाफ माहौल बनाया। दियूरी में गिरफ्तार होने से चल्थी के पुल को उड़ाने की योजना विफल रही। गोरलचौड़ मैदान की अस्थाई जेल में रखने के बाद छह अन्य सेनानियों के साथ उन्हें भी सजा सुनाई गई। अर्थदंड के साथ चौड़ाकोटी को अल्मोड़ा जेल भेजा गया। जेल में भी आंदोलन जारी रखने के चलते अंग्रेजों ने उन्हें बरेली जेल पहुंचा दिया था।
विकास के लिए भी मुखर रहे सेनानी चौड़ाकोटी
चंपावत। स्वतंत्रता सेनानी पंडित चौड़ाकोटी ने आजादी के बाद भी जिम्मेदारी को निभाया। इलाके के विकास के लिए लगातार संघर्ष किया। 1948 में साधन सहकारी समिति के सभापति, वमनजौल के सरपंच और चंपावत के ज्येष्ठ उप प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाली। 2001 में निधन से पूर्व तक वे सूखीढांग-डांडा-मीडार मोटर मार्ग सहित इलाके की तरक्की के अन्य मुद्दों के लिए आवाज उठाते रहे। रामचंद्र और 6 अन्य सेनानियों के सम्मान में नवंबर 2013 में सेनानी स्मारक बनाया गया।
© 2026. All Rights Reserved.