चंपावत नगर पालिका 75.50 लाख से करेगी विरासत कचरे का ट्रीटमेंट
पालिका ने तैयार की कूड़ा निस्तारण की कार्ययोजना
देवभूमि दुडे
चंपावत। चंपावत नगर पालिका वर्षो से डंप पड़े कूड़े-कचरे का अब वैज्ञानिक तरीके से इलाज कर बहुपयोगी उपयोग करेगी। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर पालिका द्वारा तैयार कूड़ा निस्तारण की वृहद कार्ययोजना को मंजूरी देते हुए राज्य सरकार ने विरासत कचरे (पुराने लैंडफिल) के निस्तारण के लिए 75.50 लाख रुपये की राशि अवमुक्त की है। पालिका जल्द ही नगर के विभिन्न वार्डो में अव्यवस्थित और वर्षो से डंप पड़े कूड़े के निस्तारण की कवायद शुरू की जाएगी। पालिका ने विरासत कचरे के ट्रीटमेंट के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिशासी अधिकारी भरत त्रिपाठी के अनुसार पहली बार पालिका की ओर से विरासत कचरे के प्रसंस्करण और उपचार के प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिली है। विरासत कचरे से निपटने के लिए बायो माइनिंग (जैव खनन) सबसे प्रभावी तरीका है। जिसमें कचरे को खोदकर अलग-अलग करके और उपचारित करके प्लास्टिक, धातु, कपड़ा और निर्माण सामग्री जैसे पुनर्चक्रण योग्य संसाधन निकाले जाते हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जैविक कचरे से खाद और अन्य प्रकार की सामग्री निकाले जाने से जहां बची हुई मिट्टी का उपयोग भूमि सुधार के लिए किया जाएगा, वहीं प्रदूषण का स्तर भी कम होगा।
'नगर में कचरे को अलग-अलग करना बड़ी चुनौती है। एकत्र किए गए कूड़े में से 30% से कम की प्रोसेसिंग या रिसाइक्लिंग की जाती है।अब नई योजना के लागू होने से लोगों को वर्षो से डंप पड़े कूड़े कचरे से निजात मिलेगी।'
प्रेमा पांडेय,
अध्यक्ष, नगर पालिका,
चंपावत।

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