सहकारिता के क्षेत्र में चंपावत जिले की उपलब्धि, सभी 23 PACS डिजिटलाइज हुईं
PACS कंप्यूटराइजेशन में उत्तराखंड का पहला जिला बना चंपावत
देवभूमि टुडे
चंपावा। आदर्श जिले ने सहकारिता के क्षेत्र में बड़ा आदर्श पेश किया है। इस जिले की सभी 23 PACS (Primary Agricultural Credit Socities) डिजिटलाइज हो गई हैं। कंप्यूटराइजेशन कार्य में उत्तराखंड में चंपावत जिले ने पहला स्थान हासिल किया है। कठिन भौगोलिक हालात और सीमित संसाधनों के बावजूद जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग के समन्वय से जिले ने ई-गवर्नेंस की दिशा में यह मुकाम हासिल किया है।
DM मनीष कुमार ने बताया कि पैक्स का पूर्ण कंप्यूटराइजेशन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह उपलब्धि पूरी टीम के कठिन परिश्रम और शासन के मार्गदर्शन का नतीजा है। अब किसानों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और समितियों के कार्यों में
पारदर्शिता होगी। DM का कहना है कि बहुउद्देशीय साधन सहकारी समिति को आधुनिक और किसान-हितैषी बनाना प्रशासन का लक्ष्य है।

कार्यक्रम से जुड़े रोहित बोहरा ने बताया कि इस सफलता की नींव सहकारिता सचिव डॉ. वीबी आरसीपी पुरुषोत्तम की ओर से दिए गए रणनीतिक निर्देशों और DM की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति द्वारा की गई निरंतर समीक्षा से पड़ी। CDO डॉ.जीएस खाती के मार्गदर्शन और राज्य नोडल अधिकारी के तकनीकी सहयोग ने इस जटिल प्रक्रिया को सुलभ बनाया जा सका।
सहकारी समितियों के निबंधक डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट के मार्गदर्शन में वर्ष 2024-25 के ई-ऑडिट में जिले की 23 में से 21 समितियों का कार्य पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में ये समितियां डायनेमिक डे-एंड सुविधा के साथ पूर्णत ई पैक्स के रूप में संचालित हैं।
टीम वर्क से हासिल की उपलब्धि:
राज्य के नोडल अधिकारी संयुक्त निबंधक सहकारिता मंगला प्रसाद त्रिपाठी की विशेष रणनीति को क्रियांवित करते हुए DCB, निबंधन विभाग और तकनीकी टीम ने समन्वय के साथ काम किया। विशेष रूप से डेटा एंट्री ऑपरेटरों, वार रूम सहयोगी समिति सचिव महेश बोहरा, पीयूष जोशी एवं कैशियर भूपेंद्र बिष्ट का योगदान रहा। जिन्होंने डेटा माइग्रेशन और जीएल मैपिंग जैसे कार्यों को मिशन मोड में पूर्ण किया।
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