ओखलंज में पकड़ा गया गुलदार 4 से 5 वर्ष उम्र का
लोहाघाट-बाराकोट क्षेत्र में डेढ़ माह में 3 गुलदार पकड़े गए
गुलदार 11 नवंबर से अब तक क्षेत्र में 2 लोगों को मौत के घाट उतार
अभी भी क्षेत्र में कई गुलदारों की मौजूदगी से लोगों में दहशत बरकरार
देवभूमि टुडे
चंपावत/बाराकोट। बाराकोट के ओखलंज गांव में खौफ का पर्याय बना गुलदार पिंजरे में कैद कर लिया गया है। क्षेत्र मे डेढ़ माह के भीतर 3 गुलदार गिरफ्त में आ चुके हैं। 2 गुलदार पिंजरे में जबकि तीसरे को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा गया। ओखलंज में पकड़े गए गुलदार की उम्र 4 से 5 वर्ष बताई जा रही है।
ओखलंज गांव में लंबे समय से गुलदार आबादी वाले क्षेत्रों में घुसकर जानवरों को निशाना बना रहा था। गुलदार के इंसानों पर हमलावर होने का खतरा बना हुआ था। खौफ को देखते हुए वन विभाग ने यहां पिंजरा लगाया था, लेकिन लंबे समय से गुलदार पिंजरे के आसपास नहीं फटक रहा था। आज 27 दिसंबर की सुबह ग्रामीणों ने ओखलंज के पास लगाए गए पिंजरे में गुलदार के फंसे होने की सूचना वन विभाग को दी। टीम ने मौके पर पहुंचकर पिंजरे सहित गुलदार को छीड़ा चौकी पहुंचाया।
वन क्षेत्राधिकारी राजेश जोशी ने बताया कि गुलदार की उम्र करीब 4 से 5 के बीच है। वह पूरी तरह स्वस्थ्य है। गुलदार को अल्मोड़ा रेस्क्यू सेंटर भेजे गया है। गुलदार 11 नवंबर से अब तक क्षेत्र में 2 लोगों को मौत के घाट उतारने के साथ 1 महिला को गंभीर रूप से घायल कर चुका है।
वन विभाग ने 13 दिसंबर को धरगड़ा में एक गुलदार को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा था। जबकि 17 नवंबर को च्यूरानी के पास एक और गुलदार पिंजरे में कैद हुआ था। आज 27 दिसंबर की सुबह ओखलंज में तीसरा गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार के कैद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। रेंजर के मुताबिक प्रभावित क्षेत्र में 4 पिंजरे और 10 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। वन विभाग की टीम लगातार ग्रामीणों को जागरूक कर रही है और गश्त बढ़ाई गई है। ओखलंज की ग्राम प्रधान कविता कालाकोटी ने बताया कि क्षेत्र में अभी भी कई गुलदार होने का अंदेशा है। लिहाजा वन विभाग को निरंतर गश्त करनी चाहिए, ताकि लोगों को सुरक्षा का अहसास हो।
भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश सिंह बोहरा ने बताया कि शुक्रवार देर शाम बाराकोट से ओखलंज घर लौटते समय गुलदार ने उनकी कार पर झपट्टा मारा था। गुलदार को छीड़ा चौकी पहुंचाने में वन दरोगा प्रकाश गिरी गोस्वामी, वन बीट अधिकारी राजेंद्र भट्ट, बंशीधर जोशी, रमेश चंद्र त्रिवेदी, कुंवर सिंह आदि शामिल थे।
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