पूर्णागिरि दर्शन को पहुंचे उत्तराखंड वन विभाग के मुखिया रंजन कुमार मिश्र को दिया ज्ञापन
मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी के नेतृत्व में दिया गया ज्ञापन, कहा रोड बनने से बढ़ेगा पर्यटन और रिवर्स पलायन
खर्राटाक गांव में एक सदी पहले नामी शिकारी जिम कॉर्बेट ने मारा था नरभक्षी बाघ
देवभूमि टुडे
चंपावत/पूर्णागिरि धाम। उत्तराखंड के प्रमुख शक्तिपीठ मां पूर्णागिरि धाम के पुजारियों का मूल गांव खर्राटाक अभी भी रोड से कटा हुआ है। इस गांव तक रोड की मांग को लेकर पूर्णागिरि मंदिर समिति ने फिर से आवाज उठाई है। आज 27 दिसंबर को देवी दर्शन के लिए पहुंचे उत्तराखंड वन विभाग के मुखिया HoFF (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) रंजन कुमार मिश्र को मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी के नेतृत्व में समिति ने ज्ञापन दिया।


समिति का कहना है कि श्री मां पूर्णागिरि धाम के पुजारियों के पुश्तैनी गांव खर्राटका रोड नेपाल सीमा से लगी टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर चूका से सिर्फ ढाई किलोमीटर दूर है। धार्मिक ही नहीं पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। नामी शिकार जिम कॉर्बेट ने 20वीं सदी के चौथे दशक में इसी स्थान पर नरभक्षी बाघ का खात्मा किया था। लेकिन इतना महत्वपूर्ण गांव अभी तक सड़कविहीन है। मार्ग नहीं होने से पर्यावरण प्रेमी और सैलानी नहीं पहुंच पाते हैं। वहीं सुविधाएं नहीं होने से गांव के लोग भी पलायन कर चुके हैं।
मंदिर समिति पदाधिकारियों ने कहा कि अगर खर्राटका गांव को जिम कॉर्बेट स्थल तक चूका से सड़क मार्ग से जोड़ा जाए, तो न केवल गांव गुलजार होगा, बल्कि पर्यावरण और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। इससे रिवर्स पलायन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। समिति ने ग्राम पंचायत कालीगूंठ (पूर्णागिरि) के राजस्व ग्राम खर्राटाक जिम कॉर्बेट स्थल को सड़क मार्ग से जोड़ने का आग्रह किया है। ज्ञापन देने वालों में मंदिर समिति के उपाध्यक्ष नीरज पांडेय, सचिव सुरेश तिवारी, कोषाध्यक्ष नवीन तिवारी, ग्राम प्रधान पंकज तिवारी शामिल थे। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र का चुनरी ओढ़ाकर स्वागत करने के अलावा मंदिर की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व की जानकारी भी दी।

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