बाराकोट के च्यूरानी गांव में चारा पत्ती काटने पेड़ पर चढ़ी थी महिला और दो खेत नीचे था गुलदार
पेड़ से महिला के शोरगुल करने पर ग्रामीणों ने भगाया
पिंजरे के पास नहीं, आबादी के बीच चहलकदमी कर रहे गुलदार
देवभूमि टुडे
चंपावत/बाराकोट। बाराकोट ब्लॉक के धरगढ़ा, च्यूरानी और मिर्तोली क्षेत्र में गुलदार का खौफ बरकरार है। बीती शाम च्यूरानी गांव में अपने खेत के पेड़ पर चढ़कर चारा काट रही महिला को दो खेत नीचे गुलदार बैठा दिखाई दिया। महिला के शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने शोरगुल कर गुलदार को जंगल की ओर भगाया। च्यूरानी गांव के धरगड़ा तोक में 9 दिसंबर को गुलदार एक व्यक्ति को निवाला बना चुका है। और अब फिर से गुलदार दिखने से खौफ पसर गया है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष राकेश सिंह बोहरा के मुताबिक च्यूरानी गांव और उसके आसपास गुलदार की दस्तक है। एक गुलदार को वन विभाग की टीम पहले ही पिंजरे में कैद कर चुकी है। आज 19 दिसंबर की सुबह करीब 10 बजे धरगड़ा गांव की महिलाएं पास के जंगल में चारा-पत्ती लेने गई थीं, तो उन्हें गुलदार बैठा दिखाई दिया। महिलाओं ने पटाखे फोड़े और शोर मचाया, तब जाकर गुलदार भागा। एक दिन पूर्व 18 दिसंबर को नाकोट के टाकला क्षेत्र में स्कूल जा रहे बच्चों के पीछे गुलदार के दौडऩे की घटना सामने आई थी। वन विभाग ने गांव और स्कूल के आसपास गश्त बढ़ा दी है।
वन विभाग के मुताबिक जहां गुलदार ने स्कूली बच्चों का पीछा किया था, वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके अलावा गुलदार प्रभावित अन्य क्षेत्रों में वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है। उन्होंने बताया कि च्यूरानी में पेड़ पर चढ़ी महिला को गुलदार दिखने की सूचना मिली है। गश्त करने के साथ वन विभाग लोगों को जागरूक भी कर रहा है।
इसलिए गुलदार आते हैं आबादी की ओर...
भोजन की तलाश: गुलदार अक्सर पालतू जानवरों जैसे कुत्ते, बकरियों का शिकार करने के लिए आबादी वाले इलाकों में आते हैं, क्योंकि उनके लिए यह आसान शिकार होता है।
प्राकृतिक शिकार की कमी: जब जंगल में हिरण, सूअर, बंदर जैसे उनके मुख्य शिकार कम हो जाते हैं, तो वे भोजन की तलाश में बस्तियों की ओर आते हैं।
पानी और आश्रय: कभी-कभी पानी या छिपने की जगह की तलाश में भी वे मानव बस्तियों के करीब आ जाते हैं, खासकर सूखे या अत्यधिक बारिश के मौसम में।
आवास का सिकुड़ना: जंगलों का कटने और इंसानी गतिविधियों के बढऩे से उनका प्राकृतिक पयावज़स कम हो रहा है, जिससे वे इंसानी इलाकों में घुसने को मजबूर होते हैं।
बारिश का मौसम: बरसात के मौसम में गुलदार ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और इंसानी बस्तियों के करीब देखे जाते हैं, क्योंकि इस दौरान उनके लिए जंगल में शिकार करना मुश्किल हो सकता है।
बढ़ती आबादी: गुलदारों की संख्या में वृद्धि होने पर जंगल में पर्याप्त भोजन नहीं मिलता। भोजन की जरूरत बढऩे पर वे आबादी की तरफ आते हैं।
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