पिंजरा लगाने सहित बचाव के अन्य उपाय करने की मांग को लेकर तड़ाग के ग्रामीणों का प्रदर्शन
पिछले कई दिनों से नजर आ रहा गुलदार और भालू
कई मवेशियों को मारने के साथ गांव में अक्सर दिख रहे मे वन्य जीव
देवभूमि टुडे
चंपावत/बाराकोट। गुलदार और भालू की दहशत से बाराकोट के तड़ाग गांव के लोगों की नींद उड़ी हुई है। फिक्रमंद ग्रामीणों ने इस मुश्किल हालत से निजात दिलाने की मांग की है। आज 30 नवंबर को ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर वन विभाग से वन्य जीवों से राहत दिलाने के लिए कारगर कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गुलदार और भालू के आतंक से लोग डरे सहमे हैं। आरोप लगाया कि सूचना के बावजूद वन विभाग त्वरित कदम नहीं उठा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय से गांव में गुलदार लगातार घूम रहा है, वह कई मवेशियों को निवाला बना चुका है। तीन दिन पूर्व एक भालू जंगल जा रही महिलाओं के पीछे दौड़ा, महिलाओं ने भागकर किसी तरह जान बचाई। इन घटनाओं से ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। ग्रामीणों का कहना था कि तड़ाग, कोटला, निगालीगाड़ और सिरतोली के बच्चे जंगल के रास्ते से गुजर जूनियर हाईस्कूल कालाकोट तक पहुंचते है। इससे उनकी जान को भी खतरा बना रहता है।

प्रदर्शन करने वालों में पूर्व ग्राम प्रधान होशियार सिंह बोहरा, भवान कालाकोटी, उमेद सिंह, दीपक सिंह, कमल सिंह बोहरा, दीवान सिंह, अर्जुन सिंह, रमेश राम, धन सिंह, संजय कुमार, जगत सिंह, प्रकाश कालाकोटी, ललित प्रसाद, नवीन सिंह, राम सिंह आदि ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीणों ने शीघ्र पिंजरा नहीं लगाने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
क्या कहते हैं अधिकारी:
तड़ाग क्षेत्र में पिंजरा लगाने की अनुमति नहीं मिली है। लेकिन गुलदार और भालू की सक्रियता के चलते उस वन क्षेत्र में रेंजर राजेश जोशी के निर्देशन में विभागीय टीम नियमित अंतराल में गश्त कर रही है। ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ ही बचाव के लिए सभी मुमकिन प्रयास किए जा रहे हैं।
सुनील कुमार,
उप प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।
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