जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार
21 राज्यों से आए शोधकर्ताओं ने 50 से अधिक गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र प्रस्तुत किए
ऑफलाइन व ऑनलाइन शामिल हुए देशभर के शिक्षाविद
देवभूमि टुडे
चंपावत/लोहाघाट। SCERT (उत्तराखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान) और उत्तराखंड अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की निदेशक वंदना गर्ब्याल ने गुणवत्ता वाले दस्तावेज के रूप में तैयार कर SCERT के माध्यम से देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। लोहाघाट के DIET (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) में स्कूली शिक्षा का रूपांतरण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में उन्होंने कार्यक्रम को शिक्षा की गुणवत्ता एवं नवाचार की दृष्टि से लाभप्रद बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. जितेंद्र पाटीदार ने सेमिनार को शिक्षा का महाकुंभ बताया। उन्होंने डायट और प्राचार्य डॉ. कमल गहतोड़ी की इस पहल को शोध जगत के लिए उपयोगी बताया। मुख्य शिक्षाधिकारी एमएस बिष्ट ने कहा कि ऐसे सेमिनार शिक्षकों की शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया और दक्षता में सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे। उन्होंने शैक्षिक सुधारों के साथ शैक्षिक नवाचार को भी प्रोत्साहित करने पर बल दिया। संयोजक एवं डायट के प्राचार्य
डॉ. कमल गहतोड़ी ने बताया कि देश के कई राज्यों से 210 से अधिक शिक्षाविदों-शोधकर्ताओं ने सेमिनार में शोध सार जमा किए हैं। संस्थान को 130 पूर्ण शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से शोध समिति ने 48 चुनिंदा शोध पत्रों को तकनीकी सत्रों में प्रस्तुति के लिए स्वीकृत किया है। सह संयोजक दीपक सोराड़ी ने बताया कि 21 राज्यों से आए शोधकर्ताओं ने 50 से अधिक गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र प्रस्तुत किए।
सेमिनार में संस्कृत शिक्षा के निदेशक डॉ. आनंद भारद्वाज, डॉ. विवेक व्यास, डॉ. रवि जोशी, डॉ. अनिल कुमार मिश्र, डॉ. कल्पना पाटनी लखेड़ा, जगदीश अधिकारी, डॉ. कृष्णानंद बिल्जवाण, डॉ. मोहन सिंह, मान सिंह, दिनेश खेतवाल, डॉ. केवल आनंद कांडपाल, मनोज किशोर बहुगुणा, राजेश कुमार पाठक, डायट प्रवक्ता डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव, लता आर्य, डॉ. अवनीश शर्मा, विमल किशोर, गौतम प्रसाद सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, शोधकर्ता और विशेषज्ञ ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से मौजूद थे।
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