टनकपुर प्रोटेस्ट के बैनरतले नीट पेपर लीक, दिल्ली में पुलिस ज्यादती और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर 23 जुलाई की शाम निकला था जुलूस
किसी भी प्रमुख दैनिक समाचार पत्र में नहीं छपी एक भी लाइन
देवभूमि टुडे
चंपावत। दिल्ली के जंतर-मंतर में कई टीवी चैनलों का प्रदर्शनकारी युवाओं ने बहिष्कार किया। उनकी शिकायत थी कि इन चैनलों ने आंदोलन के पहले चार हफ्तों में जंतर-मंतर की खबरों का अघोषित बहिष्कार किया था। और जब भी खबर दिखाई, तो उसमें भी मीन-मेख निकाली। वहीं दिल्ली से 340 किलोमीटर दूर टनकपुर में कल 23 जुलाई को हुए युवाओं के प्रदर्शन की खबर नहीं छपने से भी विवाद की नौबत आई। कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि स्थानीय प्रिंट मीडिया ने छात्रों और युवाओं के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, नीट पेपर लीक, दिल्ली में हुई पुलिस ज्यादाती के खिलाफ टनकपुर में हुए इस प्रदर्शन और जुलूस का अघोषित बहिष्कार किया। आरोप सही हो या न हो, लेकिन युवाओं का यह कहना ठीक है कि कल निकाले गए प्रदर्शन की खबर आज 24 जुलाई को किसी भी प्रमुख दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित नहीं हुई। प्रदर्शन में ठीकठाक संख्या में युवा और छात्र थे। साथ ही इस आंदोलन को कांग्रेस ने समर्थन दिया था और पूर्व विधायक सहित कई बड़े नेता आंदोलन में शामिल भी थे। शहर में निकाले गए इस जुलूस के अंत में नीट पेपर लीक के बाद से जान देने वाले 22 छात्र-छात्राओं को मोमबत्ती जला कर श्रद्धांजलि भी दी गई थी।
प्रमुख समाचार पत्रों में ये खबर क्यों नहीं छपी, यह तो पता नहीं चला। क्या खबरनवीसों को इस प्रदर्शन की जानकारी नहीं थी? प्रदर्शन शाम करीब 5 बजे हुआ, तो देरी की वजह से नहीं छपी? या खबर भेजी फिर भी नहीं छपी? या सभी प्रमुख अखबारों के प्रतिनिधियों की एक दिन बाद छापने पर रजामंदी बनाई? कारण चाहे जो भी, लेकिन सबसे खास बात यह है कि किसी भी प्रमुख अखबार में यह खबर आज के अंक से गायब थी। हो सकता है कि कल 25 जुलाई के अंक में ये समाचार प्रकाशित हो जाए। लेकिन इन हालातों में अगर खबरचियों की साख पर बट्टा लगे, तो इसमें दोष किसका? इस पर अखबारनवीसों को खुद से पूछना चाहिए।
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