कुछ कहते हैं कि-वे पत्रकार हैं, वे तो सब जानते हैं। जानते हों या न जानते हों, मानते तो 99% ऐसा ही हैं। वे सर्वज्ञ हैं, ये खुशफहमी उन्हें है। कहते तो यह भी है कि जो सब जानता है, दरसल वो कुछ भी नहीं जानता है। असल में समझदार तो उसे कहा जाता है, जो जानता है कि ज्ञान अनंत है और वह कुछ भी नहीं जानता है। बहरहाल ये सब कहने की जरूरत क्यों आन पड़ी।
मीडिया के हाल या ज्यादा सही कहें, तो इसकी बेहाली अब पूरी तरह बेपर्दा हो चुकी है। अब इस पारदर्शी बेहाली के दीदार पाठक, श्रोता और दर्शक सभी बिना भेदभाव करने लगे हैं। मीडिया के सत्य और तथ्य से बहुत दूर चले जाने का सिलसिला इसी 'मीडिया मर्म' के जारिए आज 17 जुलाई से शुरू किया जा रहा है। इस कॉलम में नियमित अंतराल में 'मीडिया मर्म' में मीडिया की विसंगति व विडंबनाओं का बखान होगा।
ऐसी खबरों पर पाठकों की भी भागीदारी के लिए वाट्सेप नंबर (8650888884) जारी किया जा रहा है। तथ्यपरक तरीके से बात को रखना सबका अधिकार है। साथ ही मर्यादा का ख्याल तो हम सबको रखना ही होगा।
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