Friday May 8, 2026

चंपावत के कथित सल्ली दुष्कर्म केस में SP रेखा यादव ने किया खुलासा

दुष्कर्म की पुष्टि नहीं

घटना के वक्त घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे तीनों नामजद आरोपी

कमल सिंह रावत ने अपनी एक महिला मित्र और कुछ साथियों की मदद से नाबालिक की गैग रैप की कहानी गढ़ी

गठित की गई थी 10 सदस्यी SIT

देवभूमि टुडे

चंपावत। 36 घंटे से सुर्खियों में रहा चंपावत के सल्ली का  नाबालिग गैंग रैप केस झूठा निकला। आज 7 मई की शाम चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने केस का खुलासा करते हुए ये बात कही। कहा कि यह केस आपसी रंजिश के चलते अपने विरोधियों को फंसाने के लिए सुनियोजित साजिश के तहत रचा गया था। DM मनीष कुमार की मौजूदगी में हुई पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि कमल सिंह रावत ने अपनी एक महिला मित्र और कुछ अन्य लोगों की मदद से नाबालिक की गैग रैप की कहानी को अंजाम दिया। ये षडयंत्र बदले की भावना से की गई थी। जबकि दुष्कर्म की घटना हुई ही नहीं थी। मुख्य साजिशकर्ता कमल सिंह रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच घटना के दिन कई बार संपर्क और बातचीत हुई थी।

घटना का खुलासा करती पुलिस अधीक्षक रेखा यादव। साथ में मौजूद हैं DM मनीष कुमार।

कल 6 मई को एक व्यक्ति ने कोतवाली चंपावत में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 5 मई की रात उसकी 16 साल की बेटी के साथ 3 लोगों ने गैंग रैप किया है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने तत्काल POCSO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया al। मामले की गंभीरता को देखते हुए चंपावत के CO की निगरानी में 10 सदस्यीय SIT गठित की गई। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर फॉरेंसिक टीम की मदद से वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाए। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, CWC के समक्ष काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान दर्ज कराए गए।

पुलिस के मुताबिक घटना वाले दिन नाबालिग अपने दोस्त के साथ एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए गई थी। CCTV फुटेज और CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) से उसकी गतिविधियों और विभिन्न स्थानों पर आवाजाही की पुष्टि हुई। साथ ही गवाहों के बयान तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए। पुलिस के अनुसार तीनों नामजद आरोपी पूरन सिंह रावत, विनोद सिंह रावत और नवीन सिंह रावत घटना के वक्त घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से इस बात की पुष्टि हुई है।

SP रेखा यादव ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके जांच की जा रही है, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को प्रताड़ित न होना पड़े और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। पुलिस का दावा है कि यह घटनाक्रम एक सुनियोजित षड्यंत्र की ओर संकेत करता है। पत्रकार वार्ता में CMO डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि मेडिकल परीक्षण में नाबालिग के साथ किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जोर-जबरदस्ती के कोई संकेत नहीं मिले।




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