Tuesday Jun 16, 2026

देवभूमि व्यंग्यबाण-16

सबको सच बताते हैं। जो होता है, वही दिखाते हैं। एकदम Black & White की तरह। सबसे पहले और सबसे आगे। तेज सिंह दावा और दंभ भरता जा रहा था। उनके दावों में दम दिख भी रहा था। सबसे तेज तो वे थे ही। दिखाने में भी, बताने में और काला-सफेद करने में भी। उनके दो फलसफे थे। जैसे आए वैसा ही भेजना हैं। रुबरु। कोई सुधार नहीं, किसी कमी को दूर करने की भी जहमत क्यों उठाएं? उनका तो छुपा हुआ स्लोगन ही है, जो भी जैसे भेजेगा, हम उसे बगैर कोई पल गंवाए आगे सरका देंगे। हम कोई सरक-सरक कर चलने वाले थोड़े ही हैं! जो सही-गलत, पुष्टि-अपुष्टि की छलनी लगाएं। हम तो हैं सुपर फास्ट बिल्कुल बुलेट ट्रेन की तरह। हमारी तवज्जो तो गति है फिर इसमें किसी की सदगति हो या दुर्गति, लाइन-लेंग्थ सही रहे या भटके इससे हमारा क्या लेना-देना?

 

दूसरा हम वह सब दिखाएंगे-पढ़ाएंगे, जिससे हलचल मचे, सनसनी फैले। दावों को सच से ज्यादा धार देंगे, उपलब्धियों की आरती उतारेंगे। स्तुतिगान का भजन करेंगे। तेज सिंह कहता जा रहा था कि जन और जन सरोकार को आकार देना हमारा काम नहीं, हम उसका सत्कार करेंगे, जिसका जन से नहीं, धन से सरोकार हो। हमारी खबरों से पार पाना आसान नहीं। तेजी से बदलता दौर है। 21वीं सदी का तीसरा दशक और उसका भी उत्तरार्द्ध। मीडिया के रंगढंग भी बदल रहे हैं।

खबर है या प्रचार, NEWS है या AD? इस फर्क को कोई बता दे, तो मानें। इस अंतर की रेखा बहुत महीन है। हर कोई इसे न देख पा रहा है न समझ पा रहा है। सारा खेल इसी समझ-नासमझ का है। कितने लोग सच, सच के दावे और सच के प्रचार का अंतर कर पा रहे हैं? इसी सवाल के साथ तेज सिंह का प्रवचन पूरा हुआ।




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