Thursday Oct 1, 2026

84.45 करोड़ रुपये की सरयू लिफ्ट पंपिंग पेयजल योजना का काम रेगड़ू के बाद लोहाघाट में भी शुरू

योजना से अगले 30 साल तक होगी पेयजल आपूर्ति

देवभूमि टुडे

चंपावत/लोहाघाट। लोहाघाट की सबसे विकराल समस्याओं में से एक का अगले डेढ़ साल में समाधान हो जाएगा। लोहाघाट के लोगों की प्यास बुझ जाएगी। ऐसा दावा किया जा रहा है। पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता अशोक स्वरूप ने बताया कि 30 सितंबर को सरयू पेयजल योजना का काम लोहाघाट क्षेत्र में भी शुरू करा दिया गया है, वैसे इससे पूर्व योजना के अंतर्गत रेगडू क्षेत्र में योजना का काम शुरू हो चुका है। लेकिन योजना का शिलान्यास श्राद्ध के बाद किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अंतर्गत सरयू लिफ्ट पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण कराया जा रहा है।

पेयजल वितरण वाली पाइपलाइन बिछाने का कार्य हथरंगिया चौराहे से शुरू किया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि योजना के पूरा होने के बाद लोहाघाट की लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का समाधान हो सकेगा। कार्य शुरू होने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई।

लोहाघाट में कार्य शुरू होने के दौरान पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, दर्जा मंत्री सुभाष बगौली, भाजपा प्रदेश मंत्री निर्मल माहरा, नगरपालिका अध्यक्ष गोविंद लाल वर्मा, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष गिरीश कुंवर, गोविंद बोहरा, राजू गड़कोटी, सभासद योगेश जोशी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता, विनय, दीपक नाथ, चंद्रशेखर बगौली, योगेश मुरारी, जीवन गहतोड़ी, सतीश मुरारी, सुरेश ढेक, मनोज राय, मनोज कालाकोटी आदि मौजूद थे।

सरयू पेयजल योजना का काम शुरू होने में मुंह मीठा कर खुशी जताते भाजपा कार्यकर्ता।

योजना के मुख्य बिंदु:

1.सरयू लिफ्ट पंपिंग पेयजल योजना का निर्माण 84.45 करोड़ रुपये से होगा।

2.योजना से अगले 30 साल तक क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति होगी। 28 हजार की आबादी की इस योजना से प्यास बुझेगी।

3.योजना का काम 18 माह में पूरा कराने का लक्ष्य है।

4.चार स्टेज पंपिंग योजना है। तीन टैंक तल्ली बेट्टा, मल्ला बेट्टा और छंदा रेगडू में बनेंगे। मुख्य टैंक एबटमाउंट मरोड़ाखान के पास बनाया जाएगा।

फिलहाल 3 दिन में मिलता है 1 बार पानी:

चंपावत/लोहाघाट। लोहाघाट नगर और आसपास के क्षेत्र में फिलहाल पेयजल की भारी किल्लत है। क्षेत्र में हर रोज 18 लाख लीटर से अधिक पानी की जरूरत होती है, लेकिन मिलता बमुश्किल 40% है। ऐसे में क्षेत्र के लोगों का मानना है कि अगर योजना से तयशुदा लक्ष्य के अनुरूप पेयजल मिला, तो इससे नागरिकों को राहत मिलेगी।






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