प्रेमा चिल्कोटी
महिला आरक्षण एवं नारी शक्ति अधिनियम का संदर्भ:
नारी शक्ति हमारे समाज की वह आधारशिला है, जिस पर परिवार, समाज और राष्ट्र की मजबूती टिकी हुई है। भले ही कल 17 अप्रैल को “नारी शक्ति वंदन” कानून से संबंधित 131वां संविधान संशोधन पास न हो सका, लेकिन लोकसभा व राज्यों की विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण जब भी लागू होत, उससे महिलाओं को शक्ति मिलेगी। ये कानून अंतत: महिलाओं के सम्मान, उनकी क्षमता और उनके योगदान को स्वीकार करने का एक सशक्त माध्यम है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक, महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और सामर्थ्य का परिचय दिया है।
भारतीय संस्कृति में नारी को देवी का स्वरूप माना गया है। मां, बहन, बेटी और पत्नी के रूप में वह न केवल परिवार का पालन-पोषण करती है, बल्कि समाज को संस्कार भी प्रदान करती है। आज की नारी केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल और व्यापार जैसे हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
इतिहास में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसी वीरांगनाओं ने अपने साहस और बलिदान से देश की रक्षा की। वहीं वर्तमान समय में महिलाएं अंतरिक्ष से लेकर प्रशासनिक सेवाओं तक अपनी पहचान बना रही हैं। यह परिवर्तन नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
इसी दिशा में “महिला आरक्षण” एकदम नई तस्वीर पेश करत है। जो महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान भागीदारी प्रदान करता है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था से न केवल उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि समाज के विभिन्न मुद्दों पर उनकी दृष्टि और संवेदनशीलता भी नीतियों में परिलक्षित होगी। यह कदम लोकतंत्र को अधिक समावेशी और मजबूत बनाता है।
इसके साथ ही “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” (महिला आरक्षण कानून) महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इस अधिनियम के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह कानून न केवल महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त करेगा, बल्कि उन्हें देश के विकास में बराबरी की भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा। यह अधिनियम समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने का एक ठोस कदम है।
“नारी शक्ति वंदन” का वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा, जब महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त होंगे। समाज में अभी भी कई जगहों पर महिलाओं को भेदभाव और असमानता का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर महिला को शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का अधिकार मिले।
नारी सिर्फ परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सशक्त प्रेरणा भी है। जब एक महिला शिक्षित और सशक्त होती है, तो पूरा समाज प्रगति करता है। इसलिए हमें नारी शक्ति का सम्मान करते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यह कहना उचित होगा कि “नारी शक्ति वंदन” केवल एक दिवस या कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे हमारे व्यवहार और सोच का स्थायी हिस्सा बनाना चाहिए। महिला आरक्षण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ठोस कदम इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। नारी का सम्मान ही सच्चे अर्थों में समाज की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
लेखिका चंपावत नगरपालिका की सभासद एवं सेवानिवृत शिक्षिका हैं।
© 2026. All Rights Reserved.