उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने 7 सूत्रीय मांगों को लेकर
भाजपा सरकार को अगाह किया, 22 नवंबर को प्रदेशभर की आशाएं मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगी
देवभूमि टुडे
चंपावत। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन फिर से गुस्से में हैं। आज 24 अक्टूबर को संगठन ने चंपावत में रैली निकाल अपने विरोध का इजहार किया। मानदेय में इजाफा, सेवानिवृत्ति के बाद एकमुश्त रकम सहित 7 मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आशा वर्कर्स ने चंपावत मोटर स्टेशन से कलक्ट्रेट तक रैली निकाली। अलबत्ता मुख्य द्वार बंद कर उन्हें कलक्ट्रेट तक पहुंचने से पहले रोक दिया गया। प्रशासन ने कलक्ट्रेट परिसर को धरना, प्रदर्शन या आंदोलन के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया है। बाद में एडीएम केएन गोस्वामी ने मुख्य द्वार के पास आकर ज्ञापन लिया।
संगठन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा ने कहा कि सरकार उनके साथ सौतेला बर्ताव कर रही है। उनके काम का सम्मान नहीं हो रहा है। काम का दाम भी नहीं मिल रहा है। अब वे चुप नहीं बैठेंगे। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार को इसका खामियाजा भुगतना होगा। संगठन ने कहा कि मांगों को नहीं मानने पर प्रदेश भर की आशा कार्यकर्ताएं 22 नवंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगी।



मौजूद थे ये आशा वर्कर्स:
जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा, पदमा प्रथोली, चंपा राय, ब्लॉक अध्यक्ष रीता सिंह, रूकमणि जोशी, हेमा जोशी, विनीता पांडेय, ज्योति उपाध्याय, धनी मेहता, ममता बिष्ट, पुष्पा बोहररा, तनुजा पांडेय, कमला जोशी आदि।
ये हैं प्रमुख मांगें:
1.मानदेय में वृद्धि हो।
2.न्यूनतम वेतन, कर्मचारियों का दर्जा व सेवानिवृत्ति होने के बाद पेंशन।
3.रिटायरमेंट के समय 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि मिले।
4.एनएचम का बजट बढ़ाया जए, एनजीओ की भूमिका खत्म हो।
5.आशाओं की छंटनी बंद हो।
6.सभी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के खाली पदों को तत्कााल भरें।
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