जटिल डिलीवरी की व्यवस्था नहीं, हड्डी के इलाज के लिए दूसरे जिले लगानी पड़ रही है दौड़, जनरल सर्जरी की सुविधा नहीं
टनकपुर उप जिला अस्पताल में 5 विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
देवभूमि टुडे
चंपावत/टनकपुर। जिले का सबसे बड़ा आबादी वाला क्षेत्र है टनकपुर, लेकिन यहां की सेहत के हाल ठीक नहीं है। व्यवस्थाओं को सुधारने की तमाम कोशिशों के बावजूद मैदान के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत है। न महिलाओं के इलाज की व्यवस्था है और नहीं हड्डी संबंधी उपचार का कोई बंदोबस्त। इसकी वजह विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। और मार टनकपुर-बनबसा क्षेत्र के 55 हजार से अधिक लोगों को भुगतनी पड़ रही है।
जिले का एकमात्र उप जिला अस्पताल टनकपुर में है। कुछ माह पहले अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा मिली है। जिले के इस दूसरे डायलिसिस केंद्र से किडनी की परेशानी वाले मरीजों की दुश्वारी जरूर कम हुई है। लेकिन अस्पताल में कई असुविधाएं भी हैं। एसडीएच में 22 चिकित्सकों के स्थान पर इस वक्त महज 13 की तैनाती है। न गर्भवती महिलाओं के इलाज की पुख्ता व्यवस्था है न हड्डी की चोट का इलाज नहीं जनरल सर्जरी का बंदोबस्त। ओटी कक्ष होने के बावजूद निश्चेतक नहीं होने से सर्जरी नहीं हो पा रही है। गायनाकॉलोजिस्ट के नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज से लेकर जटिल प्रसव नहीं हो पा रहा है। महिलाओं के इलाज के बाद सबसे ज्यादा मरीज हड्डी की परेशानी वाले आते हैं, लेकिन अस्थिरोग विशेषज्ञ की कमी इस इलाज पर भारी पड़ रही है। वैसे एसडीएच में चर्म रोग विशेषज्ञ का पद भी खाली है।
इन सबकी मार टनकपुर-बनबसा की 55 हजार की आबादी के अलावा टनकपुर से लगे नेपाल के आसपास के लोगों को पड़ रही है। उन्हें या तो निजी अस्पताल में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है या दूसरे जिलों के सरकारी अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।


अस्पताल में तैनात डॉक्टर:
पद नाम- पदों की संख्या-तैनाती
फिजिशियन:2-1
सर्जन:1-1
रेडियोलॉजिस्ट:1-1
नेत्र सर्जन:1-1
पैथौलॉजिस्ट:1-1
बाल रोग:1-1
दंत रोग:1-1
चिकित्साधिकारी:7-5
ये पद रिक्त हैं:
गायनाकोलॉजिस्ट: 2, फिजिशियन:1, अस्थिरोग विशेषज्ञ:1, निश्चेतक:1, ईएनटी:1, चर्मरोग विशेषज्ञ:1
चिकित्साधिकारी:2
क्या कहते हैं जिम्मेदार:
टनकपुर उप जिला अस्पताल की सुविधाओं को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर लगातार बेहतर किया जा रहा है। इस अस्पताल में डायलिसिस की दो
मशीनें लगाकर किडनी की दिक्कत वाले मरीजों को राहत दी जा रही है। ये मशीनें चौबीसों घंटे चल रही हैं। अस्पताल के डॉक्टर की स्थिति का संज्ञान मुख्यमंत्री को है। जल्द से जल्द खाली पदों को भरा जाएगा।
केदार सिंह बृजवाल,
नोडल अधिकारी,
सीएम कैंप कार्यालय, चंपावत।
क्या कहते हैं चिकित्साधिकारी:
टनकपुर एसडीएच में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली होने से दिक्कत आ रही हैं। 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित कुल 8 रिक्त पदों को भरने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों को नियमित रूप
से पत्र भेजे जा रहे हैं।
डॉ. घनश्याम तिवारी,
चिकित्साधीक्षक, एसडीएच।
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