साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच के तत्वावधान में चंपावत में हुई रविवासरीय काव्य गोष्ठी
देवभूमि टुडे
चंपावत। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक चेतना मंच के तत्वावधान में चंपावत के ऐंग्लो संस्कृत विद्यालय में हुई रविवासरीय काव्य गोष्ठी में विभिन्न कविता के विविध रंग बिखेरे गए। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी जनार्दन चिल्कोटी की अध्यक्षता और फार्मेसी अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पांडेय के संचालन में आज 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर देश के सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य, त्याग को याद करते हुए शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई।
काव्य गोष्ठी का आगाज राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. भुवन चंद्र जोशी ने इस कविता से की-
हम अकड़ कर जी रहे हैं जिंदगी, सादगी झुकना कभी आया नहीं।
भार ही झुकता रहा है सर्वदा, ये कभी भी ख्याल क्यों आया नहीं।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. तिलक राज जोशी ने कहा-
क्षणिक सभी जग की खुशियां हैं, दो पल ही बहलाते मन।
पुष्कर सिंह बोहरा ने कहा-
गर्व न करता पर्वत निज ऊंचाई का,
सागर न करता घमंड अथाह गहराई का।
फार्मेसी अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पांडेय ने कहा-
गिरना और संभलना ही जीवन की सच्चाई है,
सच्चे मन की शक्ति जुटाना, तेरी असल कमाई है।
सिप्टी जीआईसी के प्रवक्ता सामश्रवा आर्य ने कहा-
ये युवा भविष्य फिर भी बिगड़ रहा क्यूं नौजवां,
गुटखा, बीड़ी, जर्दा खैनी, खा रहा क्यूं नौजवां,
सुल्फा, दारू, जर्दा, बीड़ी, पी रहा क्यूं नौजवां।
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाचाार्य डॉ. कीर्ति बल्लभ शक्टा ने पर्यावरण संरक्षण को यूं कहा-
पर्यावरण बचायें कैसे नहीं सरल यह काम,
वृक्ष लगाये खूूब धरा कर देते हैं आराम।
हरियाली छाई रहती है जिस घर के चहुं ओर,
फल-फूलों से सजा हुआ घर लगता ललित ललाम।
शिक्षक नवीन चंद्र पंत ने कहा-
किसी पागल कवि की कल्पना हो तुम,
किसी ईश्कें मशरूख शायर की शायरी हो तुम।
जनकवि प्रकाश जोशी शूल ने कारगिल शहीदों को समर्पित ये कविता पेश की-
हमारी आन तुमसे हैं, तुम्हें हम याद करते हैं,
हमें अभिमान तुम पर हैं, तुम्हें हम याद करते हैं।
चुका सकते नहीं, हम तुम्हारे बलिदान का वो क्षण,
देश का मान तुम से हैं, तुम्हें हम याद करते हैं।
सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी जनार्दन चिल्कोटी ने कहा-
कारगिल के रण में गूंजी, वीरों कि अमर पुकार,
भारत माता खातिर दीछ अपनों जीवन अपार।
काव्य गोष्ठी में कविता शक्टा, अवनि शक्टा आदि ने भी कविता प्रस्तुत की।
काली कुमूं का विमोचन हुआ:
चंपावत। गोष्ठी के दौरान काली कुमूं पुस्तक का विमोचन किया गया। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाचाार्य डॉ. कीर्ति बल्लभ शक्टा ने इस पुस्तक को लिखा है। वे इससे पूर्व भी कई पुस्तकें लिख चुके हैं। इस मौके पर वक्ताओं ने डॉ. शक्टा के साहित्यिक योगदान को साहित्य की अमूल्य निधि बताया। साथ ही उनके साहित्यिक योगदान को साहित्य की अमूल्य निधि बताया।

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