Thursday Aug 27, 2026

चंपावत के कुलेठी स्कूल में उत्तराखंडी लोक भाषाओं की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाओं का संचालन शुरू

विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री भी दी गई

देवभूमि टुडे

चंपावत। पतंजलि योगपीठ एवं भारत स्वाभिमान मंच के जिला प्रभारी लोकमणि पंत ने कहा कि मातृभाषा हमारी संस्कृति और पहचान की सबसे बड़ी धरोहर है।उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली के तत्वावधान में कुलेठी विद्यालय में उत्तराखंडी (गढ़वाली, कुमाऊनी एवं जौनसारी) भाषा की ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाओं का संचालन के आगाज के दौरान मुख्य अतिथि पंत ने बच्चों से घर-परिवार में भी कुमाऊंनी, गढ़वाली एवं जौनसारी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करने का आह्वान किया। नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस अभियान में आंगनवाड़ी एवं प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने शिरकत की।

कुलेठी विद्यालय में विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री वितरित करते मुख्य अतिथि लोकमणि पंत एवं केंद्र प्रमुख प्रशिक्षक जनार्दन चिलकोटी एवं अन्य अतिथि।

 

 

केंद्र प्रमुख प्रशिक्षक जनार्दन चिल्कोटी ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे प्रतिदिन अपने दादा-दादी, माता-पिता एवं परिवार के अन्य बुजुर्गों से कुमाऊंनी भाषा के नए शब्द, लोकगीत, कहावतें एवं लोककथाएं सीखें और उन्हें कक्षा में अपने साथियों के साथ साझा करें। कहा कि मातृभाषा का संरक्षण तभी संभव है, जब बच्चे इसे दैनिक जीवन में बोलेंगे।वक्ताओं ने उत्तराखंड की लोक भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इस पहल को महत्वपूर्ण बताया। 

कक्षाओं का संचालन केंद्र प्रमुख प्रशिक्षक जनार्दन चिलकोटी, केंद्र प्रमुख रुद्र सिंह बोहरा और सहयोगी प्रशिक्षक भूपेंद्र सिंह देव “ताऊ” कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को अध्ययन सामग्री, कार्यपुस्तिका एवं परिचय-पत्र (आई-कार्ड) वितरित किए गए। कार्यक्रम में डूंगर देव जोशी, कमला पनेरू, हिमवत्स संस्था के प्रतिनिधि प्रकाश पुनेठा, प्रियंका सहित विद्यालय परिवार के सदस्य मौजूद थे।




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