बिना रस्सों के सहारे मां भगवती के वायुरथ ने की 25 गांवों की परिक्रमा
सुंई के आदित्य महादेव मंदिर से उठा रथ
यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब
रथ उठने के साथ वायुरथ महोत्सव का समापन
देवभूमि टुडे
चंपावत/लोहाघाट। पांच गांव सुंई और बीस गांव बिशंग के विख्यात अषाढ़ी वायुरथ महोत्सव के अंतिम दिन आज 28 अगस्त को मां भगवती की वायुरथ यात्रा निकाली गई। रथ ने बिना रस्सों के सहारे 15 किलोमीटर तक 25 गांवों की परिक्रमा की। रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर मां भगवती का आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूरा क्षेत्र मां के जयकारों से गूंज उठा।
शुक्रवार को चारद्योली के समस्त आयुधों को देवडांगर आदित्य महादेव मंदिर में लाया गया। यहां हवन-यज्ञ के बाद आयुधों को दूध और पवित्र जल से स्नान कराया गया। मंदिर में पारंपरिक पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद सभी देवडांगरों को अंगवस्त्र भेंट किए गए। इसके बाद मां भगवती की गुप्त प्यौली को आदित्य महादेव मंदिर परिसर की परिक्रमा कराई गई। पूजा-अर्चना के बाद मां भगवती का वायुरथ आदित्य महादेव मंदिर से गलचौड़ा, पऊ, चनकांडे और डुंगरी होते हुए द्यौलागढ़ पहुंचा। यहां देवडांगरों ने चावल और दूध की गाल खाई। इसके बाद वायुरथ खैसकांडे होते हुए बीस गांव बिशुंग की परिक्रमा के लिए रवाना हुआ। मार्ग में कई अन्य निश्चित स्थानों पर भी बेतालों ने दूध और चावल की गाल खाई। रथ यात्रा दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मां भगवती पर अक्षत और पुष्पों की वर्षा कर आस्था प्रकट की। बिशंग क्षेत्र में वायुरथ के पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने मां के जयकारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
देर रात वायुरथ सुंई के आदित्य महादेव मंदिर पहुंचा। यहां आरती के बाद प्यौली को उसके गंतव्य स्थान मां भगवती मंदिर चौबेगांव के लिए रवाना किया गया। रथ में देव डांगर जगदीश पुजारी सवार थे। महोत्सव समिति के अध्यक्ष श्याम चौबे, मुख्य संरक्षक सचिन जोशी सहित समिति के पदाधिकारियों ने महोत्सव में पहुंचे श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का स्वागत किया। इस दौरान इस दौरान कैलाश पांडेय, महेश पांडेय, गौरव पांडेय, योगेश ओली, त्रिभुवन चंद्र तिवारी, प्रेम चौबे, हयात सिंह माहरा, हर सिंह बिष्ट, बृजेश माहरा, नीरज करायत, नितिन मुरारी, सुनील चौबे, मयंक ओली, पंकज पुजारी, डॉ. महेश ढेक, प्रकाश खर्कवाल, मदन पुजारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
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