Monday May 11, 2026

छतकोट, पचनई के बाद खटोली तल्ली तक पहुंची नई पहल

कन्या दान में मिली कुल राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा कन्या के परिजन विवाह के उपयोग में आ रही

देवभूमि टुडे

चंपावत। चंपावत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शगुन की नई पहल लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है। छतकोट से शुरू यह पहल पचनई होते हुए अब खटोली तल्ली गांव तक पहुंच गई है। 30 अप्रैल से छतकोट शुरू यह पहल अब तक से पालबिलौना क्षेत्र के तीन ग्राम पंचायतों में की जा चुकी है।

खटोली तल्ली के ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि प्रवीण बुड़ाठी, पूर्व सरपंच उमेद सिंह बुड़ाठी सहित  अन्य ग्रामीणों ने इस पहल का आगाज आज 10 मई के विवाह से किया। उनका कहना है कि इस पहल से गांव के गरीब और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी आर्थिक मदद मिल सकेगी। जगह जगह इस पहल को लोग हाथोंहाथ ले रहे हैं। इस पहल को कमजोर व मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए मील का पत्थर बता रहे हैं। वैसे गांवों में अधिकांश परिवार गरीब तबके के ही रह गए हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि प्रवीण बुड़ाठी , रहीश बुड़ाठी, मदन सिंह बुड़ाठी, उमेद सिंह बुड़ाठी, गंगा सिंह बिष्ट आदि ने कहा कि ऐसी पहल गांव में सौहार्द, सहयोग और सामूहिकता के भाव के साथ जरूरतमंदों के लिए मददगार है।

छतकोट की ग्राम प्रधान रेखा बोहरा के इस आइडिया को अब दूरदराज के कई गांवों में भी अपनाया जा रहा है। विवाह में कन्या दान के लिए मिलने वाली कुल राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा कन्या के परिजन विवाह के लिए उपयोग में लाए। जबकि शेष 20 प्रतिशत रकम वर पक्ष को दी गई। कहा गया कि इसके जरिए आर्थिक रूप से कमजोर कन्या पक्ष को राहत पहुंचेगी।

30 अप्रैल को छतकोट से इस पहल की शुरुआत करने वाले ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि दीपक बोहरा का कहना है कि ग्रामीण समाज में शगुन की रस्म धन या उपहार का लेन-देन ही नहीं है, बल्कि यह "पारस्परिक सहयोग और मजबूत सामाजिक संबंधों" का भी प्रतीक है। "आज आपकी मदद, कल मेरी मदद" के सिद्धांत का वास्तविक अर्थ समाज में 'श्रद्धाभाव' माना जाता है, न कि केवल 'लेन-देन'। यह आशीर्वाद का एक भौतिक रूप है, जो रिश्तों को मजबूत और गहरा करता हैं। कहा कि समाज की यह मान्यता है कि आप जिन लोगों के सुख-दुख के मौकों पर साथ खड़े होते हैं, वे भी भविष्य में ऐसे मौकों पर साथ देते हैं। यह परंपरा समाज में एकजुटता के भाव को बढ़ावा देती है। यह विश्वास दिलाती है कि कठिन समय में आपके लोग आपके साथ हैं। शगुन के रूप में दिए जाने वाले ₹1 का अतिरिक्त सिक्का (जैसे 101, 501, 1001) यह दर्शाता है कि आशीर्वाद अटूट है, इसे विभाजित नहीं किया जा सकता। ऐसा माना जाता है कि शून्य अंत का प्रतीक है, जबकि वह अतिरिक्त एक रुपया एक नई शुरुआत को सुनिश्चित करता है। इस शगुन की परंपरा के सही उपयोग से अनेकों माता-पिताओं का बोझ कुछ कम जरूर होगा।




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