Thursday Jul 16, 2026

पूर्णागिरी धाम क्षेत्र में 6 माह पूर्व छपे खतरे वाले 7 पेड़ों के पातन में वन निगम के छूट रहे पसीने

मां पूर्णागिरी मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने डीएम को भेजा ज्ञापन

देवभूमि टुडे

चंपावत/पूर्णागिरी धाम। चंपावत जिले के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक धाम है पूर्णागिरी शक्तिपीठ। इसी शक्तिपीठ में जीर्णशीर्ण और खतरनाक पेड़ों को काटना चुनौती बन रहा है। और वह भी तब, जब पेड़ों का छपान करीब 6 माह पूर्व हो चुका है। पेड़ क्यों नहीं कट रहे हैं, वन निगम बताने की स्थिति में नहीं है। निगम के नकारेपन के चलते पूर्णागिरी मंदिर समिति ने अब जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया है। इसे लेकर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी ने ज्ञापन दे पेड़ों के अविलंब निस्तारण का आग्रह किया है।

पूर्णागिरी धाम क्षेत्र में खतरे की जद में आ रहे 7 पेड़ों को इस साल के शुरू में वन विभाग ने चिन्हित कर छपान किया था। छपान के बाद पेड़ों को पातन के लिए वन निगम को हस्तांतरित किया गया था। ये समूची प्रक्रिया इस साल फरवरी तक संपन्न हो गई थी, लेकिन तबसे अब तक ये वृक्ष काटे नहीं जा सके। और इस वक्त मानसून सीजन है। जिसमें अतिवृष्टि का खतरा तो बना ही रहता है, पेड़ों के जमींदोज होने का अंदेशा सो अलग। मंदिर समिति का आरोप है कि अनेकों बार वन विकास निगम के डीएलएम से आग्रह किए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। थकहार कर मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित तिवारी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेज पेड़ों के शीघ्र पातन के निस्तारण का अनुरोध किया है।

पूर्णागिरी मंदिर समिति अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी।

जवाबदेही से भाग रहे वन निगम अधिकारी:

छपान के बावजूद वृक्षों का पातन क्यों नहीं हो पा रहा है? इसे जानने के लिए टनकपुर वन विकास निगम के प्रभागीय लौगिंग प्रबंधक को (9568003242) फोन किया। लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। वाट्सेप मैसेज के जरिए सवाल भेजे, लेकिन डीएलएम की ओर से खबर भेजे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला। वन निगम एक तो अपने काम को समय पर नहीं कर रहा है, और फिर उस पर जानकारी लेने के लिए फोन करने पर फोन भी रिसीव नहीं हो रहे हैं। ये नौबत उस आदर्श जिले की है, जिसकी नुमाइंदगी स्वयं प्रदेश सरकार के मुखिया कर रहे हैं। इस मामले में वन निगम का अगर कोई जवाब मिलेगा, तो उसे प्रसारित किया जाएगा।




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