Monday Aug 24, 2026

गर्भ में हुई शिशु की मौत गर्भवती की जान बचाने के लिए लगी दूसरे जिले की दौड़

लोहाघाट विकासखंड के सीमांत क्षेत्र मटियानी का मामला

देवभूमि टुडे

चंपावत/लोहाघाट/खटीमा। गर्भ में पल रहे शिशु की जान बचाने के लिए 1 नहीं 2 नहीं बल्कि 3 अस्पताल की दौड़ लगाई, लेकिन फिर भी नन्हीं जान नहीं बच सकी। शिशु की दुनिया देखने से पहले ही गर्भ में ही मौत हो गई। परेशान करने वाली ये तस्वीर किसी और जिले की नहीं है, बल्कि उस जिले की है, जिसका सियासी रसूख भी खूब है, जो मुख्यमंत्री का जिला है और जहां स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार का दावा भी किया जा रहा है। ये वाकया दावों और हकीकत के बीच के फासले को भी बता रहा है।

चंपावत जिले का लोहाघाट ब्लॉॅक। इस विकासखंड के गुदमेश क्षेत्र रौसाल का मटियाना गांव। लोहाघाट से ही गांव की दूरी करीब 40 किलोमीटर। हरियाणा के सोनीपत में होटल में नौकरी करने वाले इस गांव के जीवन सिंह सामंत की पत्नी प्रियंका (22) गर्भवती थी। उन्हें 12 अगस्त को आशा वर्कर के साथ लोहाघाट लाया जाता है, अल्ट्रासाउंड होता है। जीवन सिंह सामंत बताते हैं कि रिपोर्ट के मुताबिक शिशु ठीक है, लेकिन पानी की कमी है। 17 अगस्त की रात पेट दर्द होता है, तो अगले दिन 18 अगस्त को महिला को गांव से लोहाघाट एसडीएच लाया जाता है, लेकिन अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है।

अल्ट्रासाउंड के लिए चंपावत भेजा जाता है। परिजन प्रियंका को अल्ट्रासाउंड के लिए चंपावत के एक निजी अस्पताल में ले जाते हैं। रिपोर्ट से शिशु के मृत होने की जानकारी मिलती है। जीवन सिंह सामंत कहते हैं कि वे पत्नी को जिला अस्पताल ले गए, लेकिन वहां एलएमओ ने गायनेकोलॉजिस्ट नहीं होने से लोहाघाट रेफर कर दिया। लेकिन लोहाघाट-चंपावत के फेर से परेशान जीवन ने पत्नी के जीवन को बचाने के लिए खटीमा की राह पकड़ी। जीवन सिंह बताते हैं कि खटीमा के निजी अस्पताल से उन्हें राहत मिली। शिशु तो पहले ही गर्भ में मर गया था, लेकिन खटीमा के अस्पताल के इलाज ने पत्नी की जान बचाई।

प्रियंका सामंत।

जीवन सिंह सामंत के सवाल:

जीवन सिंह सामंत चंपावत जिले के सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हैं। कहते हैं कि यहां अस्पताल एक जगह से दूसरी जगह रेफर करने के लिए रह गए हैं। कहीं कोई डॉक्टर नहीं है, तो कहीं कोई और डॉक्टर। इस कारण न समय पर इलाज मिल रहा है और नहीं जिंदगी बच रही है। कहते हैं कि अगर समय पर सही जानकारी और सही इलाज मिलता, तो शायद शिशु बच जाता। वे अस्पताल ही नहीं, रोड के खराब हाल को भी उजागर करते हैं। कहते हैं उनका गांव रोड विहीननहीं है, लेकिन रोड होने के बावजूद आवाजाही आसान नहीं है।

क्या कहते हैं चिकित्साधिकारी:

"गर्भ में शिशु की 15 दिन पहले मृत्यु की न तस्दीक हुई है और नहीं ऐसा किसी जांच रिपोर्ट से पुष्टि हुई है। लोहाघाट उप जिला अस्पताल में 12 अगस्त को हुए अल्ट्रासाउंड परीक्षण में बच्चा सही था, अलबत्ता पानी की कमी थी। वहीं 18 अगस्त को लोहाघाट में अल्ट्रासाउंड नहीं होने से गर्भवती महिला प्रियंका को जिला अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन गर्भवती महिला के परिजनों ने चंपावत के एक निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया था। उस रिपोर्ट में ऐसा कही नहीं कहा गया है कि शिशु की गर्भ में 15 दिन पहले मौत हुई थी। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से ऐसी जानकारी मुमकिन नहीं है, जिससे ये पता लगाया जा सके कि शिशु की कितने दिन पूर्व मृत्यु हुई है। लंबे समय से गर्भ में मृत शिशु के होने से सेप्टिक शॉॅक का खतरा भी रहता है। ये स्थिति गर्भवती महिला की सेहत के लिए बेहद गंभीर होती है।"

डॉ. विराज राठी, चिकित्साधीक्षक,

एसडीएच, लोहाघाट।

"गर्भवती महिला प्रियंका सामंत को 18 अगस्त की अपरान्ह करीब साढ़े 3 बजे चंपावत जिला अस्पताल लाया गया। इससे पहले उसी दिन गर्भवती महिला का निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड हुआ था। जिसमें शिशु के गर्भ में मृत होने की बात सामने आई थी। प्रियंका सामंत की हालत की जांच जिला अस्पताल में एक एलएमओ ने की थी। लोहाघाट की गायनेकोलॉजिस्ट ओपीडी देखने के बाद चली गई नी। एलएमओ ने जटिलता को देखते हुए गायनेकोलॉजिस्ट की देखरेख में डिलीवरी कराने को कहा। जिला अस्पताल में गायनेकोलॉजिस्ट नहीं होने से प्रियंका को आपात सेवा 108 की एंबुलेंस से लोहाघाट उप जिला अस्पताल रेफर करने का परामर्श किया गया था। मगर परिजन प्रियंका को लोहाघाट ले जाने के बजाय खटीमा के एक निजी अस्पताल ले गए।"

डॉ. हीरा सिंह ह्यांकी,

मुख्य चिकित्साधीक्षक,

जिला अस्पताल, चंपावत।




Share on Facebook Share on WhatsApp

© 2026. All Rights Reserved.