Wednesday Jul 15, 2026

अकेले चिकित्सक को गंगोत्री ड्यूटी पर भेजा गया, GNM को बाराकोट भेजा गया

जन प्रतिनिधियों ने जताया एतराज

देवभूमि टुडे

चंपावत/रीठा साहिब। लधिया घाटी की धुरी और गुरुद्वारे के लिए विख्यात चौड़ापिता (रीठा साहिब) क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा खुद बीमार है। लोग इलाज को तरस रहे हैं। बीते 4 दिनों से रीठा साहिब का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टर के है। साथ ही स्टाफ नर्स को बाराकोट भेजे जाने से गर्भवती महिलाओं की फजीहत भी बढ़ गई है। ग्रामीणो ने बताया कि आसपास के गांवों में इस हफ्ते 10 डिलीवरी संभावित है।

रीठा साहिब के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 27 जून से डॉक्टर नहीं है। यहां के अकेले डॉ. अक्षय राज खाती को गंगोत्री ड्यूटी में भेजा गया है। GNM प्रीति शर्मा को  बाराकोट भेजा गया है। और मेल स्टाफ नर्स डिलीवरी नहीं कराते हैं। पूरा अस्पताल फार्मासिस्ट अनिल तिवारी के भरोसे है। लधिया घाटी का सबसे बड़ा अस्पताल बिना डॉक्टर के होने से ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ गई है।

रीठा साहिब अस्पताल।

चौथे अस्पताल में हुई डिलीवरी:

रीठा साहिब में GNM नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा दुश्वारी हो रही है। कल 29 जून को ही मछियाड़ गांव की गर्भवती गीता देवी पत्नी दीपक भंडारी रीठा साहिब अस्पताल आई। यहां इलाज नहीं मिलने पर उन्हें पहले पाटी, फिर लोहाघाट भेजा गया। बाद में बीती रात गीता देवी ने जिला अस्पताल में एक शिशु को जन्म दिया।

क्या कहते हैं प्रतिनिधि:

फोन रिसीव नहीं कर रहे स्वास्थ्य अधिकारी: कुंदन

चौड़ापिता के प्रधान खिला देवी के प्रतिनिधि कुंदन सिंह बोहरा का कहना है कि अस्पताल के हालात बताने के लिए CMO और ACMO को फोन किया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। आज मंगलवार सुबह करीब 4 बजे साल गांव के एक व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ा। उन्हें देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं था।

कोई देखने-सुनने वाला नहीं: लक्ष्मण

चौड़ा मेहता के प्रधान लक्ष्मण मेहता का कहना है कि लधिया घाटी क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल की अव्यवस्था से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। अधिकारी व्यवस्था को सुधारना तो दूर सुनने तक को तैयार नहीं है। कोई देखने-सुनने वाला नहीं है।

CM के जिले में भी बेलगाम हैं अफसर: हयात

रीठा साहिब के पत्रकार हयात राम का कहना है कि लधिया घाटी के सबसे पुराने और सबसे बड़े अस्पताल की दुर्दशा अधिकारियों की अनदेखी का नतीजा है। मुख्यमंत्री के जिले में ये हाल लोगों की तकलीफ को बढ़ा रहे है।

क्या कहता है विभाग:

इस मामले में विभागीय पक्ष जानने के लिए CMO और ACMO को सवाल भेजे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई उत्तर नहीं मिला।




Share on Facebook Share on WhatsApp

© 2026. All Rights Reserved.