Friday Sep 25, 2026

विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026...स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी है फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना 

विष्णु गिरी गोस्वामी*

आज 25 सितंबर को विश्व फार्मासिस्ट दिवस है। सभी को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। अंतरराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल फेडरेशन (FIP) द्वारा इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 की थीम "फार्मासिस्ट: वैश्विक स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति एवं सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों का आधार" Empowering pharmacists for healthier futures" रखी गई है। यह थीम बताती है कि “स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना कितना जरूरी है। फार्मासिस्ट किन चुनौतीपूर्ण हालातों में सेवा के धर्म में रत रह इंसानी दर्द को दूद करने में जुटे हैं, उसकी चंद बानगी देखिए-

1.दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में संघर्ष और निष्ठा की मिसाल: चंपावत जिले का 80% से अधिक हिस्से में कठिन और दुरुह भौगोलिक हालात हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण वातावरण में तमाम फार्मेसी अधिकारियों द्वारा धैर्य, समर्पण और मनोयोग से की जा रही सेवा अनुकरणीय है।

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित अत्यंत दूरस्थ क्षेत्र तामली हो या सीमावर्ती इलाका बनबसा; पुल्ला, रीठा साहिब, देवीधुरा, और पाटी ब्लॉक के चिकित्सालय हों या फिर अत्यंत कठिन पहुंच वाले सुदूर क्षेत्र  लुपड़ा, धूरा और टांड-इन सभी दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत हमारे फार्मेसी अधिकारी खराब मौसम, भूस्खलन और मूलभूत संसाधनों की कमी के बावजूद तन, मन और पूरी प्रतिबद्धता से ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा में डटे हुए हैं। आपात स्थिति में जब चिकित्सकों का पहुंचना भी कठिन होता है, तब यही फार्मेसी अधिकारी प्रथम उपचारकर्ता (First Responder) बनकर मरीजों की जान बचाते हैं।

2.प्रमुख चिकित्सालयों में 500 से अधिक ओपीडी और पदों की भारी कमी का संकट: जहां एक ओर हमारे साथी सुदूर गांवों में डटे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के बड़े अस्पतालों में फार्मेसी अधिकारियों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव बन रहा है।

जिला चिकित्सालय चंपावत, उप जिला चिकित्सालय टनकपुर और लोहाघाट जैसे प्रमुख अस्पतालों में रोजाना औसतन 500 से अधिक मरीजों की ओपीडी (OPD) रहती है। अत्यंत खेद का विषय है कि मरीजों के इतने भारी दबाव के बावजूद इन बड़े अस्पतालों में फार्मेसी अधिकारियों के मात्र दो-दो पद ही स्वीकृत हैं।

प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों को दवा वितरण, दवाओं का सुरक्षित भंडारण, ऑनलाइन एंट्री और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को केवल दो अधिकारियों द्वारा संभालना बेहद कठिन है। इसके कारण जहाँ मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है, वहीं फार्मेसी अधिकारियों पर भी अत्यधिक मानसिक एवं शारीरिक दबाव रहता है।

शासन-प्रशासन से अपील:

विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर राज्य सरकार, प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से ये अनुरोध करते हैं कि:

1.पदों में अनिवार्य वृद्धि: बड़े अस्पतालों (जिला चिकित्सालय चंपावत, उप जिला चिकित्सालय टनकपुर व लोहाघाट) में ओपीडी की संख्या के अनुपात में फार्मेसी अधिकारियों के नए पद अनिवार्य रूप से स्वीकृत एवं बढ़ाए जाएं।

2.दुर्गम क्षेत्रों हेतु प्रोत्साहन: सुदूरवर्ती व सीमावर्ती उप केंद्रों में सेवारत फार्मेसी अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा ढांचा उपलब्ध कराया जाए।

'सेवा परमो धर्म:' है हमारा संकल्प: संसाधनों और पदों की कमी सहित कई चुनौतियों  के बावजूद, चंपावत का प्रत्येक फार्मेसी अधिकारी इस वर्ष की थीम को सार्थक करते हुए यह संकल्प लेता है कि हम 'सेवा परमो धर्म:' के ध्येय के साथ जिले के अंतिम गांव तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते रहेंगे। आप सभी को विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं!

जिलाध्यक्ष,डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, चंपावत।






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