Saturday Jun 27, 2026

टनकपुर उप जिला अस्पताल में अप्रैल 2025 से नहीं था कोई अस्थिरोग विशेषज्ञ

अस्थिरोग विशेषज्ञ सहित 4 विशेषज्ञ डॉक्टरों के टनकपुर स्थानांतरण होने से जगी उम्मीद

ईएनटी डॉ.सुकृति त्रिपाठी ने ज्वाइन किया

देवभूमि टुडे

चंपावत/टनकपुर। जिले के सबसे अधिक आबादी वाले सरकारी अस्पताल में तकरीबन सवा साल बाद ऑर्थोपैडिक सर्जन मिलने की आस जगी है। टनकपुर के उप जिला अस्पताल में अस्थिरोग विशेषज्ञ सहित कुल 4 डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया है। अगर ये चिकित्सक कार्यभार ग्रहण करते हैं, तो इससे मरीजों को लाभ मिलने सहित अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार होगा।

टनकपुर उप जिला अस्पताल में 22 चिकित्सकों के स्थान पर इस वक्त महज 13 की तैनाती है। न गर्भवती महिलाओं के इलाज की पुख्ता व्यवस्था है न हड्डी की चोट का इलाज नहीं जनरल सर्जरी का बंदोबस्त। गायनाकॉलोजिस्ट के नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज से लेकर जटिल प्रसव तक नहीं हो पा रहे हैं।

महिलाओं के इलाज के बाद सबसे ज्यादा मरीज हड्डी की परेशानी वाले आते हैं, लेकिन अस्थिरोग विशेषज्ञ की कमी भारी पड़ रही थी। इन सबका असर जिले के मैदानी क्षेत्र टनकपुर-बनबसा की 55 हजार की आबादी के अलावा टनकपुर से लगे नेपाल के आसपास के लोगों को भुगतना पड़ा। उन्हें या तो निजी अस्पताल में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है या दूसरे जिलों के सरकारी अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।

लेकिन अब इस स्थिति में सुधार की उम्मीद है। शासन ने टनकपुर अस्पताल में चार डॉक्टरों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। अस्थिरोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ और ईएनटी डॉक्टर को टनकपुर भेजा जा रहा है। इनमें से ईएनटी डॉक्टर ने ज्वाइन कर लिया है। वैसे सभी चिकित्सकों के कार्यभार ग्रहण करने के बावजूद गायनाकोलॉजिस्ट के 2, निश्चेतक, फिजिशियन और चर्म रोग विशेषज्ञ का एक-एक पद खाली है।

 

इन डॉक्टरों का हुआ है टनकपुर स्थानांतरण:

अस्थिरोग विशेषज्ञ: प्रिंस महेश्वरी।

जनरल सर्जन:गजेंद्र कुमार सोनी।

ईएनटी डॉक्टर:सुकृति त्रिपाठी।

बाल रोग विशेषज्ञ:वसुधा मिश्रा।

क्या कहते हैं चिकित्साधिकारी:

टनकपुर उप जिला अस्पताल को चार विशेषज्ञ चिकित्सक मिले हैं। इनमें से एक डॉक्टर (ईएनटी) ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। इन डॉक्टरों के आने से इलाज में सुधार होगा। अब अस्पताल में ऑपरेशन कराने का भी प्रयास किया जाएगा। निश्चेतक का पद खाली है, लेकिन इसके लिए वैकल्पिक बंदोबस्त किए जाएंगे।

डॉ. घनश्याम तिवारी,

चिकित्साधीक्षक, एसडीएच।




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