अल्ट्रासाउंड को छोड़ कर OPD से संबंधित अधिकांश सेवाओं पर पड़ा असर
चंपावत जिला अस्पताल में बाहर से दवाएं नहीं लिखने को लेकर उठा था विवाद, सभी दवाओं की उपलब्धता के बाद काम करने की बात कही, बाद में OPD पर वापस लौटे डॉक्टर्स
देवभूमि टुडे
चंपावत। जिला अस्पताल में आज 12 फरवरी को करीब 3 घंटे तक OPD (वाह्य मरीज विभाग) ठप रही। डॉक्टर्स के कार्य बहिष्कार की वजह से ये नौबत आई। OPD बंद रहने से मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ी। गतिरोध खत्म होने के बाद डॉक्टर्स फिर से काम पर लौटे और करीब मध्यान्ह 12 बजे बाद OPD सेवाएं सुचारू हो सकी।
कल 11 फरवरी को जिलाधिकारी मनीष कुमार के औचक निरीक्षण के दौरान कुछ दवाओं को बाहर से लिखा गया था। इस पर जिलाधिकारी ने बाहर से दवाएं नहीं मंगाने के निर्देश दिए, ताकि गरीब लोगों पर आर्थिक बोझ न पड़े। DM के इस आदेश के बाद बाहर से दवाएं नहीं लिखने के निर्देश से संबंधित पत्र अस्पताल प्रबंधन द्वारा जारी किया गया था। इस पत्र के बाद डॉक्टर्स का कहना था कि सभी दवाओं की
उपलब्धता के बाद काम करेंगे। इससे करीब तीन घंटे के लिए OPD का काम प्रभावित हो गया। इस दौरान अल्ट्रासाउंड को छोड़ कर OPD से संबंधित अधिकांश सेवाओं पर असर पड़ा। बाद में डॉक्टर्स को समझाने और DM के निर्देश के बाद OPD का कार्य बहिष्कार वापस लिया गया।
OPD ठप होने से चंपावत ही नहीं लोहाघाट, बाराकोट और अन्य दूरदराज के इलाकों से आए मरीजों को भी दुश्वारी हुई। उन्हें फजीहत के साथ लंबा इंतजार करना पड़ा। बाद में OPD सुचारू होने से मरीजों को राहत मिली।



क्या कहते हैं CMS:
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रदीप सिंह बिष्ट ने बताया कि कतिपय मिसअंडरस्टेंडिंग के चलते कुछ डॉक्टर्स नाराज थे। डॉक्टर्स का कहना था कि जिम्मेदारी से काम करने के बावजूद उन पर उठ रही अंगुली उठ रही है। ऐसे में सभी दवाओं के आने पर ही वे काम करेंगे। डॉक्टर्स को समझाने और DM के निर्देश के बाद कार्य बहिष्कार वापस ले लिया गया। जिन दवाओं की उपलब्धता नहीं है, अति आवश्यकीय होने पर दवाओं को जेनरिक नाम के साथ बाहर से लिखा जा सकता है। इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है। इसी के साथ OPD सुचारू हो गई है। लोकल लेवल पर खरीद के लिए जिलाधिकारी ने 5 लाख रुपये दिए हैं। पानी और अन्य व्यवस्थाओं को भी ठीक करने के लिए जिलाधिकारी ने पहल की है।
क्या कहते हैं DM:
गरीब मरीजों को दवाओं और अन्य चिकित्सकीय जरूरतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिला अस्पताल को 5 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। जरूरत होने पर चिकित्सा प्रबंधन समिति के कोष का उपयोग किया जाएगा। अस्पताल में सर्वोत्तम इलाज मिले, यह सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा अस्पताल की पानी की व्यवस्था को ठीक कराया जा रहा है।
मनीष कुमार,
DM, चंपावत।
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