मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र के सुदूर बकोड़ा गांव में न इलाज न सड़क
80 साल के दीवान सिंह को 8 किलोमीटर पैदल ले जाकर पहुंचाया अस्पताल
2012 से लटकी है मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क
देवभूमि टुडे
चंपावत/तल्लादेश/टनकपुर। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के बकोड़ा गांव में जिंदगी दुष्कर है। यहां के लोगों के लिए 21वीं सदी का तीसरा दशक नहीं, 20 वीं सदी का तीसरा दशक चल रहा है। देश की स्वतंत्रता के साथ गुलामी से मुक्त वे भी हुए, लेकिन समस्याओं से उन्हें आजादी नहीं मिली। सुविधाओं और समाधान के लिए उनका इंतजार पहले जैसा है। न इलाज है न पढ़ाई न जीने लायक अन्य कोई सुविधा। आजादी की 80वीं वर्षगांठ के 1 सप्ताह बाद आज 22 अगस्त को भी ऐसे ही हाल है। जिसमें एक बीमार को एक डंडे में बांधकर अस्पताल ले जाने को ग्रामीण मजबूर हैं। और ये विडंबना न किसी विपक्षी विधायक के निर्वाचन क्षेत्र की है और नहीं सत्तारूढ़ दल के किसी सामान्य विधायक के क्षेत्र की, बल्कि खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्वाचन क्षेत्र चंपावत के एक सुदूर गांव की है। उस क्षेत्र की है, जहां सभी त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि सत्तारुढ़ पार्टी के हैं। इतना ही नहीं इस अकेले चंपावत क्षेत्र से एक, दो नहीं बल्कि पांच दर्जा मंत्री भी हैं।
पूरा वाक्या क्या है? इसे सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं। मोस्टा ग्राम पंचायत का बकोड़ा गांव। गहत की दाल की खेती के लिए हल जोतने के दौरान 80 साल के दीवान सिंह के पांव में 6 दिन पहले काटा या शीशा कुछ चुभ गया था। लेकिन मौसम की खराबी और दूसरे कारणों से दीवान सिंह इलाज के लिए आज 22 अगस्त को टनकपुर अस्पताल पहुंचाए गए।
मोस्टा से सीम गांव तक करीब 8 किलोमीटर दूरी को तय करने के लिए 1 डंडे का आसरा। डंडे में बांधे गए दीवान सिंह को 4 (रवींद्र रावत, जगदीश सिंह, प्रियांशु और केदार) लोग करीब 2 घंटे में सीम गांव तक लाए। फिर सीम से जीप के जरिए करीब 35 किलोमीटर दूर टनकपुर के अस्पताल ले जाया गया।


2012 में मंजूर हुई थी सड़क:
मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क 2012 में मंजूर हुई थी, लेकिन वन अनापत्ति की वजह से काम शुरू नहीं हो सका। पिछले साल लोनिवि के बजाय कार्यदाई एजेंसी पीएमजीएसवाई की गई।2025 में डीएम मनीष कुमार ने इस रोड की डीपीआर बनाने एवं वन आनापत्ति की पत्रावली के तेजी से निस्तारण के आदेश दिए। लेकिन इन तमाम प्रयासों के बाद भी सड़क का काम अभी शुरू नहीं हो सका। रोड बनने से (अकेड़ी, मोस्टा, ग्वानी और बकोड़ा) 4 गांवों की 503 की आबादी को लोभ होता। ग्राम प्रधान रवींद्र रावत कहना है कि रोड बनने से पलायन तो रुकता ही, साथ ही रिवर्स माइग्रेसन में भी तेजी आती।
क्या कहते हैं अधिकारी:
22.30 किलोमीटर लंबी मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। DPR बनाई जा चुकी है। ₹ 18.30 करोड़ की DPR भारत सरकार भेजी गई है वन प्रस्ताव अपलोड कर दिया गया है। स्वीकृति के बाद सड़क का काम शुरू करा दिया जाएगा।
वीरेंद सिंह बोहरा,
अधिशासी अभियंता,
पीएमजीएसवाई, चंपावत खंड।
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