थपलियालखेड़ा गांव को अपने देश की चक्की का आटा कब होगा नसीब
बिजली नहीं होने से नेपाल की चक्की के आटे पर आश्रित हैं भारत के थपलियालखेड़ा गांव के लोग
45 परिवार वाले थपलियालखेड़ा गांव में रहते हैं 249 लोग
देवभूमि टुडे
चंपावत/थपलियालखेड़ा। नेपाल सीमा से लगे भारतीय गांव थपलियाखेड़ा के लोगों का उजाले का सपना उत्तराखंड बनने के 25 साल से अधिक बीतने के बावजूद अधूरा है। और वह भी तब, जब थपलियालखेड़ा में बिजली के पोल खड़े हो चुके हैं, लाइन बिछ चुकी है और ट्रांसफार्मर लग चुका है, लेकिन फिर भी इस गांव के घर रोशन नहीं हो पा रहे हैं। बिजली नहीं होने से सैलानीगोठ ग्राम पंचायत के थपलियालखेड़ा गांव के लोगों को अपने देश की चक्की का आटा भी नसीब नहीं है। बिजली नहीं होने और डीजल के ऊंचे दाम से थपलियालखेड़ा में चक्की नहीं है। इस कारण यहां के लोग नेपाल के ब्रहमदेव मंडी की चक्की का पीसा आटा खाने को मजबूर हैं।




सामरिक लिहाज से महत्वपूर्ण थपलियालखेड़ा में राज्य बनने के ढाई दशक बाद भी बिजली नहीं है। जुलाई 2025 में बिजली लाइन भी बिछने और कनेक्शन के लिए आवेदन करने के बावजूद कनेक्शन अभी तक नहीं मिल सके हैं। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। 45 परिवार और 249 की आबादी वाले गांव के लोगों का कहना है कि गांव में सौर ऊर्जा की बिजली तो है, लेकिन इससे घरों की जरूरत पूरी नहीं हो पाती है।
थपलियालखेड़ा में 63 किलोवाट के एक ट्रांसर्फामर के अलावा एसएसबी चौकी से थपलियालखेड़ा गांव तक बिजली के पोल जुलाई 2025 में लगाए जा चुके हैं। लेकिन वन अनापत्ति दूर नहीं होने से काम में अड़चन आ रही है। ऐसे में वन विभाग और ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब बिना अनापत्ति के लाइन बिछने सहित कई काम हो सकते है, तो कनेक्शन क्यों नहीं दिए जा सकते हैं?
क्या कहते हैं UPCL के अधिकारी:
वन आपत्ति में कतिपय खामी को दूर करने के लिए वन विभाग ने फिर से ने पत्रावली वापस की थी। ऊर्जा निगम ने खामियों को दूर कर पत्रावली वन महकमे को भेज दी है। वन अनापत्ति मिलने के बाद आगे का काम किया जाएगा। वैसे थपलियालखेड़ा के 35 लोगों ने कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया है।
विजय कुमार सकारिया,
अधिशासी अभियंता,
ऊर्जा निगम, चंपावत खंड।
क्या कहते हैं वनाधिकारी:
कतिपय खामियों के चलते भारत सरकार ने वन पत्रावली में आपत्ति लगाई थी। खामियां दूर कर कुछ दिनों पूर्व ही पत्रावली फिर से भेजी गई है।
शालिनी जोशी,
उप खंड अभियंता,
शारदा उप खंड, टनकपुर।

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