चंपावत विकासखंड के छतकोट ग्राम पंचायत के राजसेरा तोक में 2025 में राजस्व विभाग द्वारा जांच के बाद भी नहीं की गई आगे की कार्यवाही
पलायन के अलावा खेती और भवन निर्माण को लेकर बना है असमंजस
देवभूमि टुडे
चंपावत। चंपावत विकासखंड की छतकोट ग्राम पंचायत के राजसेरा तोक में ऐच्छिक चकबंदी की प्रक्रिया पिछले 9 माह से लटकी है। इसके चलते क्षेत्र के लोगों की खेती, आवास निर्माण सहित कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पलायन के साथ ही विकास कार्यों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।

छतकोट की ग्रामीणों ने सहमति बनाकर राजसेरा तोक की भूमि को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चकबंदी करने की मांग पिछले साल सरकार से की थी। जिस पर उस तोक के भू-मालिकों ने हस्ताक्षर कर सहमति दी थी। राजस्व विभाग ने मौके की जांच तो की, लेकिन उसके बाद विभागीय चाल बेहद सुस्त हो गई। बस कार्यवाही गतिमान है, यही कहा जा रहा है। वहीं चकबंदी को मूत्र रूप देखने के लिए बेताब ग्रामीणों का कहना है कि 9 महीने बाद भी धरातल पर कार्य शुरू नहीं हो सका है। छतकोट की ग्राम प्रधान रेखा बोहरा का कहना है कि राजसेरा तोक में ग्रामीण अपनी बिखरी जमीन तक नहीं पहचान पा रहे हैं, जिससे खेती और भवन निर्माण में दिक्कत हो रही है और पलायन बढ़ रहा है।
वहीं कुछ समय पहले उत्तराखंड सरकार ने 11 पर्वतीय जिलों में स्वैच्छिक चकबंदी नीति को कैबिनेट में मंजूरी दी थी, इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। सरकार ने 5 साल में 275 गांवों, हर जिले में 10 गांवों में चकबंदी का लक्ष्य रखा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूर्व से सहमति वाले राजसेरा तोक को चंपावत के पहले 10 गांवों में प्राथमिकता दी जाए।


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