जनकवि प्रकाश जोशी 'शूल'*
माता नन्दा-सुनन्दा हैं वरदायिनी
हैं भक्तों को अपने शुभ फलदायिनी
आये हैं हम सब तेरे द्वार मां
अब कर दो हमारा भी उद्धार मां
निज चरणों में लेकर हमें तार दो
हम हैं सन्तान तेरी हमें प्यार दो
है अंधेरी निशा हमको घेरे हुए
मां! नाशो इसे तुम बनकर दामिनी
माता नन्दा-सुनन्दा हैं वरदायिनी
हैं भक्तों को अपने शुभ फलदायिनी
हमारा अज्ञान हर कर हमें ज्ञान दो
झूठा अभिमान हर कर हमें सम्मान दो
भर के नैनों में अपने निहारो हमें
भव में भटके हुए हैं उबारो हमें
शूल पथ से दु:खों को करो दूर मां!
है बिनती करजोरी हे! जगत व्यापिनी
माता नन्दा-सुनन्दा हैं वरदायिनी
हैं भक्तों को अपने शुभ फलदायिनी
भाद्रपद-शुक्ल की शुभ तिथि अष्टमी
कदली के तरु की छबि है बनी
माता नन्दा-सुनन्दा सी मंजुल छबि
अब तक जगत में नहीं है बनी
तेरे दर्शन से मिलते हैं सब सुख हमें
तुम्हीं हो जगत की तिमिरनाशिनी
माता नन्दा-सुनन्दा हैं वरदायिनी हैं भक्तों को अपने शुभ फलदायिनी
*निरौ सदन जोशीखोला, क्वेरालाघाटी चम्पावत।
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