Thursday Aug 20, 2026

चंपावत के विशेष सत्र न्यायालय का फैसला

10 जुलाई 2024 को बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पहुंचीं प्रधान के साथ कुछ ग्रामीणों ने धक्का-मुक्की, जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करने के अलावा जूतों की माला पहनाई थी

देवभूमि टुडे

चंपावत। गुदमी (बनबसा) की पूर्व ग्राम प्रधान विनीता राना के साथ अपमानजनक बर्ताव करने वाले ग्रामीणों को उनकी करनी का फल भुगतना पड़ा। चंपावत के विशेष सत्र न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखनी वाली तत्कालीन प्रधान विनीता राणा के साथ बदसलूकी करने वाले 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराया है। दोषी ठहराए गए अभियुक्तों में से 5 महिलाएं हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने बताया कि सभी 10 गुनाहगारों को 5-5 साल की सजा के अलावा 37 हजार-37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।

वर्ष 2024 में 6 से 9 जुलाई की आपदा में बनबसा के कई गांव बाढ़ की चपेट में आए थे। तत्कालीन ग्राम प्रधान राणा का कहना था कि 10 जुलाई 2024 को आपदा पीड़ितों को राहत सामग्री बांटने में मदद देने के लिए प्रशासन ने उन्हें बुलाया था। लेकिन प्रधान के वहां पहुंचने से पूर्व ही कुछ ग्रामीणों के भड़काने पर 5 महिलाओं सहित कुल 10 लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, गालीगलौज कर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया एवं जूतों की माला पहना दी।

तत्कालीन प्रधान विनीता राणा की तहरीर पर 9 लोगों के खिलाफ नामजद व कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ बनबसा थाने में 11 जुलाई 2024 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 115, 351, 352, 192 के अलावा 3 (1) (डी), (एम), (आर), (एस), एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ था। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद विशेष सत्र न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई। तमाम गवाहों, साक्ष्यों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद अदालत ने सभी 10 अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में दोषी पाया। विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी-एसटी) जिला जज अनुज कुमार संगल ने सभी दोषियों को 5-5 साल की सजा के अलावा कुल 37 हजार-37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।

 

 

दोषी ठहराए गए 10 अभियुक्तों के नाम:

हेमा खड़ायत (48 वर्ष), लीला दिगारी (45), जानकी कलौनी (50), दिनेश कलौनी (53), रोहित जेम्स (35), पिंकी जेम्स उर्फ सारिका (43), निखिल जेम्स उर्फ अमन (23), संजीव सिंह (45), निर्मला दिगारी (47) और संदीप लॉरेंस (54) सभी निवासी गुदमी, बनबसा, चंपावत।

इन धाराओं पर मिली ये सजाएं:

BNS की धारा 115 में: प्रत्येक दोषी पर 2 हजार-2 हजार रुपया जुर्माना।

BNS की धारा 126 में: प्रत्येक दोषी पर 2 हजार-2 हजार रुपया जुर्माना।

BNS की धारा 192 में: प्रत्येक दोषी पर 2 हजार-2 हजार रुपया जुर्माना।

BNS की धारा 351 में: प्रत्येक दोषी पर 2 हजार-2 हजार रुपया जुर्माना।

BNS की धारा 352 में: प्रत्येक दोषी पर 2 हजार-2 हजार रुपया जुर्माना।

BNS की धारा 221 में: प्रत्येक दोषी पर 2 हजार-2 हजार रुपया जुर्माना।

SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (1)(D):5-5 वर्ष का साधारण कारावास और 10 हजार-10 हजार रुपये का जुर्माना।

SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (1)(M):2-2 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार-5 हजार रुपये का जुर्माना।

SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (1)(R):2-2 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार-5 हजार रुपये का जुर्माना।

SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (1)(S):2-2 वर्ष का साधारण कारावास और 5 हजार-5 हजार रुपये का जुर्माना।

अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर BNS की धारा 115, 126, 192, 351, 352 व 221 की प्रत्येक धारा के अंतर्गत 15-15 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा।

SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (1)(D), (M), (R) व (S) के अंतर्गत प्रत्येक धारा में 1-1 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा।

पीड़िता को प्रतिकर:

दोषियों द्वारा अर्थदंड जमा कर दिये जाने पर उसमें से 1 लाख रुपए पीड़िता विनीता राना को उनके बैंक खाते के माध्यम से दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा भी पीड़िता को 1 लाख रुपए की प्रतिकर धनराशि दी जाएगी। जिसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चंपावत द्वारा की जाएगी।




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