सूचना विभाग का दावा-अराजक तत्वों ने तथ्यों की पुष्टि किए बिना भ्रामक एवं आधारहीन समाचार प्रसारित किया
देवभूमि टुडे
चंपावत। कल 12 जुलाई ही की तो बात है। एक खबर, क्या सोशल मीडिया क्या प्रिंट मीडिया, हर जगह सुर्खियों में थी। शुरुआत News Website से हुई। अधिकांश पोर्टलों ने पढ़ाई और फिर अखबारों ने भी आगे बढ़ाई। लेकिन रात होते-होते सूचना महकमे ने इसकी हवा निकाल दी। विभाग ने कल रात 9:18 बजे इसे FAKE बता दिया।
खबर क्या थी? पहले यह जानते हैं। चंपावत से करीब 60 किमी दूर भिंगराड़ा क्षेत्र की खबर अधिकांश News Website में चली। खबर थी-प्रशासन से सहयोग न मिलने पर ग्राम प्रधान ने स्वयं के संसाधनों से शुरू कराया नैनीताल बैंक रोड का सुधारीकरण- कई फोटों के साथ लंबी-चौड़ी खबर।
दिनभर चली इस खबर को सूचना विभाग ने रात होते-होते FAKE (झूठा) करार दिया। बकौल सूचना विभाग- ग्राम पंचायत भिंगराड़ा में विकास कार्यों एवं महिला सशक्तिकरण को मिल रहा है शासन-प्रशासन का निरंतर सहयोग: ग्राम प्रधान गीता भट्ट। सूचना विभाग की सूचना में खबर लिखने वाले मीडिया कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विभाग ने प्रधान के हवाले से कहा कि कतिपय अराजक तत्वों द्वारा तथ्यों की पुष्टि किए बिना ही अत्यंत भ्रामक एवं आधारहीन समाचार प्रसारित किए जा रहे हैं, जो पूर्णतः सत्य से परे तथा निराधार हैं। सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों पर यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि भिंगराड़ा में नैनीताल बैंक मार्ग का सुदृढ़ीकरण एवं मरम्मत कार्य बिना प्रशासनिक सहयोग के किया जा रहा है, जो कि पूर्णतः असत्य और भ्रामक है।
दो तरह के दावों के बीच सच और झूठ का फर्क कैसे होगा? मीडिया और सूचना विभाग में कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ? कोई एक सच या झूठ लिख-बोल रहा है या दोनों आधा सच और आधा झूठ? गलत लिखने-बोलने वालों पर क्या कोई Action होगा या सिर्फ जुबानी हमला? दोनों पक्षों (मीडिया और सूचना विभाग) की आगे जो भी दलील होगी, उसे पाठकों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।
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