मीडिया मर्म...
मीडिया के बड़े हिस्से ने सच बताना छोड़ दिया है? तथ्यों से तौबा कर दी है। सत्य और तथ्य से ऊपर उठ चुका मीडिया अब लोगों को वास्तविकता बताने के बजाय प्रोपगैंडा का हिस्सा बन रहा है। हर जगह हरियाली, हर मौसम गुलाबी की तर्ज पर काम कर रहा है। आज 2 अगस्त को भी एक ऐसी ही खबर प्रिंट के बड़े हिस्से में छपी है। जो बताया गया, जैसा बताया गया, उसे रूबरू छापने और सच छुपाने में महारथी मीडिया ने फिर वही किया, जिसके लिए वह कुख्यात हो चुका है।
खबर थी अमोड़ी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन शुरू होना। यह ठीक है कि 2.18 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित अस्पताल भवन पूरा होने के बाद 29 जून को लोकार्पण हो चुका है। यह भी ठीक है इसका संचालन 1 अगस्त से शुरू कर दिया गया है। लेकिन मीडिया ने यह नहीं बताया कि अस्पताल का संचालन जुगाड़ से हो रहा है। डॉक्टर किसी और अस्पताल से संबद्ध, फार्मासिस्ट कहीं ओर से। अभी न उपकरण मिले हैं और नहीं पदों का सृजन हुआ है। अमोड़ी के इस अस्पताल के लिए एक डॉक्टर सहित कुल 6 पदों को सृजित करने के लिए सीएमओ ने महानिदेशालय और डीएम ने शासन को पत्र भेजा है। लेकिन अभी पदों का सृजन नहीं हुआ है। इस सच को बताने की मीडिया के अधिकांश हिस्से की हिम्मत नहीं रही। ऐसे गैर जिम्मेदार मीडिया से जनता और पाठकों के प्रति जवाबदेही की कैसे उम्मीद की जा सकती है?
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