5 अगस्त 2025 को दो लड़कियों को नदी में बहने से बचाया था
मुख्यमंत्री बाल वीरता पुरस्कार के लिए चयनित हुई चंपावत के घुरचुम गांव की माया कांडपाल
देवभूमि टुडे
चंपावत। इस साल से शुरू 'मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार चंपावत के एक छोटे से गांव घुरचुम की माया कांडपाल को मिलेगा। माया ने 5 अगस्त 2025 को अपनी बहन और एक अन्य लड़की को उफनाई नदी में बहने से बचाया था। जिला स्तरीय चयन समिति की संस्तुति के आधार पर नोडल एजेंसी महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने माया कांडपाल का इस पुरस्कार के लिए चयन किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 6 नवंबर को देहरादून में हर जिले के एक-एक विजेता बच्चे को पुरस्कृत करेंगे। चयनित बालिका कल 3 नवंबर को देहरादून रवाना होगी।

2 जिंदगी बचाने के कारण हुआ चयन:
चंपावत ब्लॉक के दूरस्थ घुरचुम गांव के किसान भुवन चंद्र कांडपाल की बेटी माया कांडपाल ने पिछले साल 5 अगस्त की सुबह बहादुरी दिखाते हुए 2 जिंदगियां बचाई थी। पिता भुवन कांडपाल बताते हैं कि बरसात के वक्त 5 अगस्त को स्कूल जाने वाली सड़क मलबा आने से बंद थी। तब तीनों बच्चे उफनाई नदी से स्कूल जाने लगे। इसी बीच माया की बहन कोमल और आरती स्कूल के लिए निकले। लेकिन उफनाई नदी में कोमल और आरती बहने लगे। तभी सब्र और सूझबूझ का परिचय देते हुए 12वीं की छात्रा माया कांडपाल ने दोनों को नदी से खींच निकाला। जिससे दोनों बच्चियों की जिंदगी बच गई। माया कांडपाल इस वक्त अमोड़ी डिग्री कॉलेज से बी.ए. की पढ़ाई कर रही है।
पुरस्कार के ये हैं मुख्य बिंदु:
1.पुरस्कार राशि: हर चयनित बच्चे को 51 हजार रुपये, एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।
2.हर साल उत्तराखंड के सभी 13 जिलों से 1-1 बच्चे यानी कुल 13 बच्चों को चयनित किया जाएगा।
3.घटना के समय बच्चे की उम्र 6 से 18 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
4.असाधारण साहस, किसी की जान बचाने, खेल व साहसिक गतिविधियों में अदभुत बहादुरी दिखाने वाले बच्चे को दिया जाता है।
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