21 अप्रैल 2007 को किया था कलक्ट्रेट सहित तमाम कार्यालय का लोकार्पण
तब नए-नए बने जिला पंचायत सदस्य मुकेश महराना को साफ-सुथरी सियासत के लिए लोगों से जुड़ने और समाजसेवा की सीख दी थी मेजर जनरल खंडूरी ने
देवभूमि टुडे
चंपावत। तारीख थी 21 अप्रैल साल था 2007। उत्तराखंड में BJP की पहली निर्वाचित सरकार बने 1 माह ही हुआ था। प्रदेश के कड़क प्रशासनिक छवि और अनुशासन के लिए मशहूर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी कुमाऊं दौरे में सबसे पहले चंपावत आए। आज श्रीखंड चौड़ में जिस जगह पर कलक्ट्रेट, विकास भवन, शिक्षा भवन, कोषागार, SP कार्यालय सहित तमाम दफ्तर हैं, उनका लोकार्पण 21 अप्रैल 2007 को तत्कालीन CM खंडूड़ी ने ही किया था। तब दो दिनी दौरे में अफसरों से लेकर भाजपा पदाधिकारियों और आम लोग उनके काम करने के सधे हुए अंदाज से रू-ब-रू हुए थे।

पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के आज 20 मई को हरिद्वार में पंचतत्व में विलीन होने के बाद उन्हें याद करते हुए ये तमाम बातें उत्तराखंड चाय विकास सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष मुकेश महराना ने कही। अपने चाचा मदन सिंह महराना के हादसे में मौत के बाद रिक्त हुई जिला पंचायत की बिरगुल सीट से अप्रैल 2007 में मुकेश महराना नए-नए जिला पंचायत सदस्य बने थे। तत्कालीन CM ने तब उन्हें साफ-सुथरी सियासत के लिए लोगों से जुड़ने और समाजसेवा की सीख दी थी।
उस वक्त चंपावत के ब्लॉक प्रमुख रहे बहादुर सिंह फर्त्याल बताते हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में भुवन चंद्र खंडूड़ी ने चंपावत में लगे जनता दरबार में जन समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि समाधान भी किया। जहां गड़बड़ दिखी, वहां अफसरों को डांट जनता की सुनने और सुध लेने की नसीहत भी दी। 2007 में बनी खंडूड़ी सरकार में इकलौती महिला मंत्री बीना महराना भी चंपावत से ही थी।
मेजर जनरल खंडूरी का कल 19 मई को 91 साल की उम्र में निधन हो गया था। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड में 2007 से 2009 और अक्टूबर 2011 से मार्च 2012 तक मुख्यमंत्री रहे। दिवंगत खंडूरी 5 बार सांसद रहने के अलावा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।


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