Thursday Aug 27, 2026

कुमाऊंनी जनकवि प्रकाश जोशी शूल की मांग

कुमाऊंनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने सहित कई आग्रह किए

देवभूमि टुडे

चंपावत। कुमाऊंनी साहित्यकार जनकवि प्रकाश जोशी शूल ने चंद शासन काल में राजकाज की भाषा रही कुमाऊंनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है। इसे लेकर उन्होंने सरकार को पत्र भेजा है। कहा कि कुमाऊंनी भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने से लेकर रोजगारपरक भाषा बनाने की दिशा में काम किया जाए।

प्रकाश जोशी शूल।

शूल ने कहा कि कुमाऊंनी कवि, लेखक और साहित्यकारों को ठहरने एवं साहित्यिक आयोजनों के लिए साहित्यिक सदन की हर जिले में स्थापना की जाए। कुमाऊंनी साहित्यकारों को पुस्तक प्रकाशन के लिए समुचित राशि दी जाए और वर्तमान नियम, शर्तों में शिथिलता बरती जाए। विपन्न एवं बेरोजगार साहित्यकारों को 55 साल पूर्ण करने के बाद पेंशन दी जाए। साहित्यकार शूल ने कहा कि उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा हर साल दिए जाने वाले पुरस्कारों के लिएमांगी जाने वाली पुस्तकों का मूल्यांकन पुस्तकों की मौलिकता एवं उत्कृष्टता के आधार पर किया जाए।

शूल की कुमाऊंनी में प्रकाशित रचनाएं:

1.ठेकुवा:कुमाऊंनी भाषा साहित्य का सबसे पहला हास्य व्यंग्य संग्रह।

2.जन पियो शराब:कुमाऊंनी काव्य कृति।

3.मनैकितीस: कुमाऊंनी काव्य कृति।

4.म्यारा पहाड़कि चेलि:कुमाऊंनी काव्य कृति।




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